जनसुनवाई में विद्युत नियामक आयोग के सामने रो पड़े पार्षद-पति:उद्यमी बोले- 1912 मिलता नहीं, मीटर खराब बताकर भेज दिया 57 लाख का बिल
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जनसुनवाई में विद्युत नियामक आयोग के सामने रो पड़े पार्षद-पति:उद्यमी बोले- 1912 मिलता नहीं, मीटर खराब बताकर भेज दिया 57 लाख का बिल
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की ओर से सोमवार को द स्पोर्ट्स हब में जनसुनवाई की गई। आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व केस्को एडी सैमुएल पाल एन की मौजूदगी में हो रही सुनवाई में वार्ड 102 बेगम पुरवा से पार्षद पति व पूर्व पार्षद अकील शानू समस्याएं बताते हुए रो पड़े। उन्होंने रोते हुए कहा कि जनता ने हमको वोट देकर जिताया है। हमारी जनता परेशान है। समस्या होने पर 1912 पर काल नहीं उठती है। प्रीपेड मीटर से जनता रो रही है। हम कुछ कर नहीं पा रहे हैं। पार्षद पति ने आयोग को अपना शिकायती पत्र भी सौंपा। इनके अलावा उद्यमियों और आमजनता का गुस्सा भी नियामक आयोग के सामने फूटा। 1912 पर घंटों करनी पड़ता है इंतजार जन सुनवाई में आए उद्यमियों का गुस्सा भी केस्को पर जमकर फूटा है। दादा नगर कोपे स्टेट से आए अशोक जुनेजा ने कहा कि 1912 नंबर केस्को द्वारा शिकायत दर्ज करने के लिए दिया गया है। यह दो दो तीन तीन घंटे मिलता ही नहीं है। यदि मिल गया तो एक, दो और तीन दबाने में उलझा देता है। शिकायत दर्ज नहीं हो पाती है। शिकायत दर्ज हो गई, उसके बाद सब स्टेशन जाओ तो पता चलता है कि वहां शिकायत ही नहीं पहुंची। ऐसे में हमारा कारोबार प्रभावित होता है। हमारी मांग है कि सब स्टेशन पर शिकायत दर्ज होने वाली पुरानी व्यवस्था को लागू किया जाए। मेंटीनेंस के काम का विकेंद्रीकरण किया जाए। महीनों नहीं देते बिजली कनेक्शन अरुण कुमार जैन ने बताया कि निवेश मित्र के जरिए इंडस्ट्रीयल मीटर कनेक्शन को अप्लाई करने के बाद 30 दिन का समय निर्धारित है। लेकिन इतने आब्जेक्शन लगा दिए जाते हैं कि तीन तीन महीने बीत जाते हैं, कनेक्शन नहीं हो पाता। सीएम का विजन है कि यूपी को इंडस्ट्रीयल हब बनाना है। केस्को बाबा आदम के जमाने के नियमों से चल रहा है। 67 एचपी के ऊपर के कनेक्शन में ट्रांसफार्मर लगवाना अनिवार्य है। आज के समय में ट्रांसफार्मर की कीमत हमारी मशीनों से ज्यादा है। हमारी मांग है कि इस सीमा को बढ़ाकर 150 एचपी किया जाए। इसके अलावा बिजली कनेक्शन तत्काल दिया जाए। मेरा मीटर सही, केस्को कह रहा खराब दादा नगर के उद्यमी धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि साल 2018 से मेरी फैक्ट्री के मीटर की सीटी खराब बताकर जुलाई 2025 में 57 लाख बिल भेज दिया। जबकि हर महीने एमआरआई से बिल आता है। यदि सन 2018 से मीटर खराब था तो अधिकारी क्या कर रहे थे। मेरी किराए की फैक्ट्री है। चार पांच लाख रुपए की दाना मशीन है। मेरा मीटर सही है। यदि खराब है तो अधिकारियों पर कार्रवाई हो कि उन्होंने मुझे क्यों नहीं बताया। इन्होंने नियामक आयोग के अध्यक्ष को शिकायती पत्र सौंपा है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद आया 10 गुना बिल चकेरी क्षेत्र से आईं शबाना ने बताया कि जबसे स्मार्ट मीटर लगा है तबसे मेरा बिल बढ़कर आ रहा है। मेरा पहली बार 9000 रुपए बिल आ गया, जबकि स्मार्ट मीटर के पहले मेरा बिल 1000 रुपए के आसपास रहता था। केस्को गए वहां अलग अलग बातों को बताकर मुझे दौड़ाया जा रहा है। मैंने आज एमडी से शिकायत की है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
