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सिख समाज की ‘न्याय यात्रा’ पीलीभीत से शुरू:राष्ट्रपति को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा


                 सिख समाज की 'न्याय यात्रा' पीलीभीत से शुरू:राष्ट्रपति को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा

सिख समाज की ‘न्याय यात्रा’ पीलीभीत से शुरू:राष्ट्रपति को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव कुलदीप सिंह भुल्लर ने उत्तर प्रदेश के सिख समाज की समस्याओं और अधिकारों को लेकर एक व्यापक मुहिम शुरू की है। इसी क्रम में उन्होंने सोमवार को पीलीभीत से ‘न्याय यात्रा’ का शंखनाद किया। यात्रा शुरू होने से पहले भुल्लर ने जिलाधिकारी पीलीभीत के माध्यम से राष्ट्रपति को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा। यह यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से होकर गुजरेगी। ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि सिख समाज ने देश की आजादी और मुगलों के आक्रमण से भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए हैं। आजादी के बाद अन्न संकट के दौरान, तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के आह्वान पर सिखों ने तराई और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में आकर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया और हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भुल्लर ने कहा कि इसके बावजूद आज सिख समाज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है और अपने हक-अधिकारों से वंचित है। कुलदीप सिंह भुल्लर द्वारा राष्ट्रपति को सौंपे गए इस मांग पत्र में सिख समाज से संबंधित 10 प्रमुख सूत्रीय मांगें शामिल हैं। इनमें हरिद्वार में 1984 में क्षतिग्रस्त हुए ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री ज्ञान गोदड़ी साहिब को उसी स्थान पर पुनः निर्मित करने की अनुमति देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, 1950 के बाद पंजाब से आकर बसे किसानों की जमीनों को ‘भूमिधर’ घोषित करने की मांग की गई है, जिन्हें लेखपालों ने कथित तौर पर अवैध तरीके से वन विभाग या अन्य श्रेणियों में दर्ज कर दिया है। राजनीतिक भागीदारी के तहत, विधान परिषद में दो सिखों को मनोनीत करने और सरकार में जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी देने की मांग की गई है। अल्पसंख्यक आयोग में कम प्रतिनिधित्व को देखते हुए एक अलग ‘सिख आयोग’ के गठन की भी मांग की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में, सिखों के लिए अलग विश्वविद्यालय की स्थापना और स्कूलों में सिख गुरुओं व योद्धाओं का इतिहास अनिवार्य रूप से पढ़ाने की मांग की गई है। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, एमएसपी पर अनिवार्य खरीद और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को ₹10,000 मासिक भत्ता व सरकारी आवास देने की मांग भी इस ज्ञापन का हिस्सा है।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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