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सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज:मेरठ के पूर्व कमिश्नर और आवास विकास के चेयरमैन विस्तृत रिपोर्ट के साथ पहुंचे
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई है। इससे पहले अदालत के सख्त रुख के चलते प्रशासनिक अमला रविवार को अवकाश के दिन भी सक्रिय रहा, वहीं कार्रवाई के डर से कई व्यापारियों ने खुद ही अपने निर्माण तोड़ने शुरू कर दिए। दरअसल, एक अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट तलब करते हुए परिषद अध्यक्ष को पेश होने के निर्देश दिए थे। इसके बाद दो अप्रैल को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से रिपोर्ट दाखिल की गई। कोर्ट ने मामले में विस्तृत हलफनामा मांगा और छह अप्रैल की तारीख तय की।
सुनवाई से पहले रविवार को भी परिषद कार्यालय खुला रहा, जहां अधिकारियों ने पूरे मामले से जुड़ी फाइलें तैयार कीं। दूसरी ओर, बाजार में कई व्यापारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए अपने अवैध निर्माणों पर खुद ही हथौड़ा चलाया। मामले में अदालत ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी. गुरु प्रसाद और मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को भी पक्ष रखने के लिए तलब किया है। गौरतलब है कि पूर्व कमिश्नर ने 27 अक्टूबर 2025 को ध्वस्तीकरण पर रोक लगाते हुए सेंट्रल मार्केट को ‘मार्केट स्ट्रीट’ घोषित करने के लिए मास्टर प्लान में संशोधन का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत माना जा रहा है।
इधर, कार्रवाई की आशंका से व्यापारियों में भारी बेचैनी है। रविवार को बड़ी संख्या में व्यापारी भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत शारदा अग्रवाल के शास्त्रीनगर स्थित कैंप कार्यालय पहुंचे। तिरंगा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार गर्ग के नेतृत्व में पहुंचे व्यापारियों ने अपनी समस्याएं रखते हुए नाराजगी जताई। व्यापारी नेताओं का कहना है कि अब तक 250 से अधिक व्यापारी अपना कारोबार बंद कर चुके हैं, जबकि करीब 550 व्यापारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। उन्होंने इसे जीवन-मरण का संकट बताते हुए सरकार से राहत की मांग की। व्यापारियों ने यह भी कहा कि टैक्स और जीएसटी देने के बावजूद उन्हें उजाड़ा जा रहा है। अब पूरे मामले में सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जो शास्त्रीनगर के सैकड़ों व्यापारियों के भविष्य का फैसला तय कर सकती है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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