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अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज मामले में कुलपति का आदेश वापस:नए सिरे से होगी सुनवाई, कोर्ट ने कहा दोनों पक्षों को सुना जाए


                 अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज मामले में कुलपति का आदेश वापस:नए सिरे से होगी सुनवाई, कोर्ट ने कहा दोनों पक्षों को सुना जाए

अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज मामले में कुलपति का आदेश वापस:नए सिरे से होगी सुनवाई, कोर्ट ने कहा दोनों पक्षों को सुना जाए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रसेन कन्या पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की प्रबंध समिति से जुड़े एक मामले में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (या संबंधित विश्वविद्यालय) के कुलपति को अपने पिछले आदेश को वापस लेने की अनुमति दी। साथ ही मामले में दोनों पक्षों को सुनकर नए सिरे से सकारण आदेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अग्रसेन कन्या पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की प्रबंध समिति व अन्य की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया है। मामला कॉलेज की प्रबंध समिति और शिक्षकों/कर्मचारियों के बीच का है। एकल पीठ के एक आदेश के अनुपालन में कुलपति ने गत 27 फरवरी को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश को प्रबंध समिति ने अदालत में चुनौती दी थी। कुलपति का आदेश अनजाने में गया सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने यह स्वीकार किया कि कुलपति का पिछला आदेश अनजाने में और जल्दबाजी में हो गया था, जिसमें पक्षकारों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिल सका था।
उन्होंने कोर्ट से कुलपति को उक्त आदेश वापस लेने और नए सिरे से सुनवाई करने की अनुमति देने का अनुरोध किया। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कुलपति को पुराना आदेश वापस लेने की छूट दी। साथ ही कॉलेज की प्रबंध समिति से अपनी विस्तृत आपत्ति, नियुक्ति पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। जवाब के लिए दो सप्ताह का समय कोर्ट ने कहा कि कुलपति यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रबंध समिति की आपत्तियों की कॉपियां सभी विपक्षी शिक्षकों/कर्मचारियों को मिलें। उन्हें भी जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद कुलपति तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई की तारीख तय करेंगे। सभी पक्षों को संक्षिप्त व्यक्तिगत सुनवाई देने के बाद एक स्पष्ट और सकारण आदेश करेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुलपति स्वतंत्र निर्णय लेंगे और उच्च शिक्षा निदेशक के पूर्व के किसी आदेश से प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मामला कुलपति के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेगा। इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने विशेष अपील और लंबित अर्जियों को निस्तारित कर दिया है।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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