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बाबा विश्वनाथ के आंगन में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी:नक्षत्र, योग, व्रत और त्योहारों की मिलेगी सटीक जानकारी, हर दिन के 30 मुहूर्तों का मिलेगा विवरण


                 बाबा विश्वनाथ के आंगन में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी:नक्षत्र, योग, व्रत और त्योहारों की मिलेगी सटीक जानकारी, हर दिन के 30 मुहूर्तों का मिलेगा विवरण

बाबा विश्वनाथ के आंगन में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी:नक्षत्र, योग, व्रत और त्योहारों की मिलेगी सटीक जानकारी, हर दिन के 30 मुहूर्तों का मिलेगा विवरण

काशी में अब बाबा विश्वनाथ के भक्त न केवल महादेव के दर्शन करेंगे, बल्कि भारत की प्राचीन और वैज्ञानिक काल गणना पद्धति से भी रूबरू होंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर के चौक क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ स्थापित की है। उज्जैन के बाद वाराणसी देश का दूसरा ऐसा प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया है, जहां मयह अनूठी घड़ी लगाई गई है। रविवार को इस घड़ी का चालू किया गया है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक संबंधों का संगम इस घड़ी का उपहार मध्य प्रदेश सरकार की ओर से काशी और उज्जैन (दो ज्योतिर्लिंगों) के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान, डॉ. मोहन यादव ने इस 700 किलोग्राम वजनी घड़ी को बाबा विश्वनाथ के चरणों में अर्पित किया। यह पहल सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयोजित ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ के अवसर पर की गई। अब जानिए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के बारे में… वैदिक घड़ी को लखनऊ की संस्था ‘आरोहण’ के आरोह श्रीवास्तव ने टीम की मदद से तैयार किया है। इसमें GMT के 24 घंटों को 30 मुहूर्त (घटी) में बांटा गया है। हर घटी का धार्मिक नाम और खास मतलब है। घड़ी में घंटे, मिनट और सेकेंड वाली सुई भी रहेगी। सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर यह टाइम कैलकुलेशन करती है। मुहूर्त गणना, पंचांग, मौसम से जुड़ी जानकारी भी हमें इस घड़ी के जरिए मिलेगी। वैदिक घड़ी से पहले जानिए IST और GMT क्या हैं…? ब्रिटिश शासन में हमारे देश के 2 टाइम जोन थे- कोलकाता और दूसरा मुंबई। बाद में IST (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) बना, यानी एक देश का एक ही मानक समय। हमारा GMT +5.30 है। मतलब ग्रीनविच मीन टाइम से 5.30 घंटे आगे। GMT एक ऐसी यूनिट है, जिससे दुनिया के समय का आकलन किया जाता है। ग्रीनविच इंग्लैंड का एक गांव है। GMT को 1884 में मान्यता दी गई थी। 1972 तक यह ‘अंतर्राष्ट्रीय सिविल टाइम’ का मानक बन गया। स्थान की काल गणना के अनुसार सूर्योदय का समय यह घड़ी सूर्योदय से ऑपरेट होती है। जिस जगह पर जो सूर्योदय का समय होगा, उस स्थान की काल गणना उसी के अनुसार होगी। स्टैंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहेगा। इस ऐप में वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टैंडर्ड टाइम, ग्रीनविच मीन टाइम, तापमान, वायु गति, आर्द्रता, भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत मास, ग्रह स्थिति, योग, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति, पर्व, शुभ अशुभ मुहूर्त, घटी, नक्षत्र, जयंती, व्रत, त्योहार, चौघड़िया, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, आकाशस्थ, ग्रह, नक्षत्र, ग्रहों का परिभ्रमण आदि की जानकारी रहेगी। अब जानिए घंडी की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व काशी हमेशा से भारतीय पंचांग और ज्योतिष गणना का केंद्र रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि उज्जैन ‘समय गणना’ की नगरी है और काशी ‘पंचांग’ की। इन दोनों का मिलन भारत की प्राचीन वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पटल पर फिर से स्थापित करेगा। वैदिक घड़ी का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को यह बताना है कि भारत का समय विज्ञान कितना उन्नत था। जहाँ ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) केवल घंटों और मिनटों की बात करता है, वहीं वैदिक घड़ी पल, प्रतिपल और नक्षत्रों की सूक्ष्म गणना करती है, जो कृषि, स्वास्थ्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनिवार्य है। अब तीन तस्वीर में देखिए घड़ी को कैसे देख सकते हैं…


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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