कानपुर देहात में पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना:2 एकड़ से कम पर ₹5000, 5 एकड़ से अधिक पर ₹30,000 तक का दंड
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कानपुर देहात में पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना:2 एकड़ से कम पर ₹5000, 5 एकड़ से अधिक पर ₹30,000 तक का दंड
कानपुर देहात में उप कृषि निदेशक हरीशंकर भार्गव ने किसानों को पराली जलाने के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम पर्यावरण और मृदा की उर्वरता को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है। भार्गव ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ता है, जिससे उसकी भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसका सीधा असर खेत की उत्पादकता पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, पराली जलाने से आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है, जो जान-माल के लिए हानिकारक हो सकता है। सरकार ने पराली जलाने को दंडनीय अपराध घोषित किया है। नियमों के अनुसार, 2 एकड़ से कम क्षेत्र पर पराली जलाने पर ₹5000 प्रति घटना, 2 से 5 एकड़ तक ₹10,000 प्रति घटना और 5 एकड़ से अधिक पर ₹30,000 प्रति घटना का जुर्माना लगाया जाएगा। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) अधिनियम की धारा 24 एवं 26 के तहत की जाएगी। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए कई वैकल्पिक उपाय सुझाए गए हैं। इनमें फसल कटाई के बाद हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, एमबी प्लाऊ जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर अवशेषों को मिट्टी में मिलाना शामिल है। किसान यूरिया या वेस्ट डीकंपोजर का छिड़काव कर जैविक खाद भी तैयार कर सकते हैं। अन्य विकल्पों में पराली से कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट बनाना, इसे पशु चारे के रूप में उपयोग करना या गौशालाओं में दान देना शामिल है। जिला प्रशासन द्वारा “पराली दो–खाद लो” योजना भी चलाई जा रही है, जिसके तहत दो ट्रॉली पराली देने पर एक ट्रॉली गोबर खाद उपलब्ध कराई जाती है। कृषि निदेशक ने किसानों से पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए पराली न जलाने की अपील की है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
