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BJP में रामपुर से सहारनपुर तक ब्राह्मणों का सूपड़ा साफ:मंत्री और MP-MLA तो छोड़िए, ब्लॉक-जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर बोर्ड-आयोग में भी ब्राह्मण नहीं


                 BJP में रामपुर से सहारनपुर तक ब्राह्मणों का सूपड़ा साफ:मंत्री और MP-MLA तो छोड़िए, ब्लॉक-जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर बोर्ड-आयोग में भी ब्राह्मण नहीं

BJP में रामपुर से सहारनपुर तक ब्राह्मणों का सूपड़ा साफ:मंत्री और MP-MLA तो छोड़िए, ब्लॉक-जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर बोर्ड-आयोग में भी ब्राह्मण नहीं

वेस्ट यूपी में ब्राह्मणों का भाजपा में सूपड़ा साफ हो चुका है। रामपुर से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूसरे छोर सहारनपुर तक नजर दौड़ाएं तो एक भी ब्राह्मण नेता पिक्चर में नजर नहीं आता। इन दोनों मंडलों में न तो कोई ब्राह्मण एमपी-एमएलए है और न ही एमएलसी है। इनमें से किसी जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर भी आपको ब्राह्मण नेता बैठा नजर नहीं आएगा। संगठन की बात करें तो रामपुर से लेकर सहारनपुर तक एक भी जिले या महानगर का पार्टी अध्यक्ष ब्राह्मण को नहीं बनाया गया है। इतना ही नहीं, किसी भी बोर्ड या आयोग तक में किसी ब्राह्मण को नॉमिनेट नहीं किया गया है। पूरे वेस्ट यूपी में संगठन में ले देकर सिर्फ हरिओम शर्मा का नाम आता है, लेकिन उनका भी कार्यकाल कब का पूरा हो चुका है। हाशिए पर धकेले जाने से ब्राह्मण समाज आहत है। यूपी में पहले से नाराज चले आ रहे ब्राह्मण की ये नाराजगी भाजपा को वेस्ट यूपी में इस बार तगड़ा झटका दे सकती है। पार्टी से जुड़े कुछ ब्राह्मण नेता जहां बगावत के मूड में हैं वहीं ब्राह्मण समाज ने इस मुद्दे पर अभी से ड्राइंग रूम मीटिंगें शुरू कर दी हैं। वेस्ट में मुजफ्फरनगर बेल्ट में पहले से ही ठाकुर वर्सेज जाट की कोल्ड वार झेल रही भाजपा के लिए ब्राह्मणों की नाराजगी एक नया जख्म दे सकती है। ठाकुर नेता संगीत सोम और वेस्ट यूपी के बड़े जाट नेता डॉ. संजीव बालियान के बीच का टकराव पहले ही पार्टी के लिए सिरदर्द बना है। अब ब्राह्मणों की नाराजगी भाजपा के लिए सिरदर्द बनी है।
मुरादाबाद और सहारनुपर मंडल में ब्राहम्मण पूरी तरह पिक्चर से गायब
मुरादाबाद मंडल और सहारनपुर मंडल के 8 जिलों की बात करें तो यहां ब्राह्मण भाजपा के भीतर पूरी तरह से पिक्चर से आउट हैं। मंत्री, सांसद, विधायक, एमएलसी, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, जिला अथवा महानगर अध्यक्ष, किसी भी आयोग या बोर्ड में नॉमिनेटेड पदाधिकारियों की सूची में एक भी ब्राह्मण यहां आपको नजर नहीं आएगा। वेस्ट यूपी टीम में जगह नहीं मिली तो बगावत कर सकते हैं नेता
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि यदि वेस्ट यूपी की गठित होने जा रही टीम में ब्राह्मणों को सम्मानजनक पद नहीं मिलता है तो इसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है। वेस्ट यूपी में संगठन के अध्यक्ष पद की बात करें तो यहां लज्जारानी गर्ग के बाद चौधरी भूपेंद्र सिंह एक दशक से अधिक वक्त तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने तक यह कुर्सी भूपेंद्र चौधरी के पास ही थी। इसके बाद अश्चनी त्यागी को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उनके बाद फिर से जाट नेता मोहित बेनीवाल वेस्ट यूपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाए गए। मोहित बेनीवाल के बाद ठाकुर नेता सत्येंद्र सिसोदिया को यह कुर्सी मिली। ब्राह्मण नेताओं का तर्क है कि वैश्य, ठाकुर, जाट और त्यागी समाज के बाद अब इस कुर्सी पर ब्राह्मणों की दावेदारी सबसे अधिक मजबूत है। एक भाजपा नेता ने दैनिक भास्कर से कहा- ब्राह्मणों को हाशिए पर धकेलने के लिए साजिशें हो रही हैं। एक कद्दावर नेता को ये पसंद नहीं है कि उनके अलावा वेस्ट में किसी का वर्चस्व हो। इसलिए ऐसे किसी व्यक्ति को वेस्ट यूपी अध्यक्ष की कुर्सी सौंपने की प्लानिंग की जा रही है जो उनका आज्ञाकारी हो और हर स्थिति में उनके लिए समर्पित रह सके। इसलिए ये कोशिश की जा रही है कि ब्राह्मण समाज के बजाए ओबीसी से किसी नेता को पश्चिम का अध्यक्ष बनाया जाए, लेकिन वह जाट नहीं होना चाहिए। ऐसे में गुर्जर और सैनी नेताओं के नाम आगे बढ़ाए गए हैं। वेस्ट यूपी के ये रहे अध्यक्ष भाजपा वेस्ट यूपी में संगठनात्मक दृष्टि से कुल 19 जिले भाजपा वेस्ट यूपी में कुल 14 जिले हैं। इनमें मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर, मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद, बागपत,गौतमबुद्ध नगर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली शामिल हैं। भाजपा संगठन की दृष्टि से देखें तो इन जिलों की तादाद 19 है। भाजपा ने महानगरों वाले जनपदों को 2 जिलों में विभक्त किया है। इनमें एक महानगर और दूसरा बाकी जनपद है। इस तरह मुरादाबाद महानगर, मुरादाबाद, मेरठ महानगर, मेरठ, सहारनपुर महानगर, सहारनपुर और गाजियाबाद महानगर, गाजियाबाद शामिल हैं। गौतमबुद्ध नगर में भी दो संगठनात्मक जिले हैं।

19 जिलों में महज 2 ब्राह्मण जिलाध्यक्ष
वेस्ट यूपी के 19 जिलों में से महज 2 जनपदों में ब्राह्मण जिलाध्यक्ष हैं। इनमें से एक बागपत के जिलाध्यक्ष नीरज शर्मा हैं और दूसरे गौतमबुद्ध नगर में अभिषेक शर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा बाकी किसी भी जिले में ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष या महानगर अध्यक्ष नहीं बनाया गया है। मुरादाबाद मंडल में पहले कम से कम एक जिले का अध्यक्ष ब्राह्मण होता था, लेकिन इस बार वो कुर्सी भी ब्राह्मण नेताओं से छिन गई है। 14 में सिर्फ एक सांसद, वाजपेयी को राज्यसभा
वेस्ट यूपी के इन जिलों में कुल 14 सांसद हैं। इनमें से सिर्फ एक ब्राह्मण हैं। गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा को छोड़ दें तो बाकी कोई दूसरा ब्राह्मण एमपी नहीं है। इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी जरूर राज्यसभा में पार्टी की ओर से भेजे गए हैं। लेकिन ये बात ध्यान में रखनी होगी कि मेरठ बेल्ट में ब्राह्मण नेताओं की पहले से पकड़ रही है।

41 भाजपा विधायकों में सिर्फ 4 ब्राहम्म्ण एमएलए
वेस्ट यूपी के 14 जिलों की बात करें तो यहां कुल 71 विधानसभा सीट हैं। इनमें से 41 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। इन 41 भाजपा विधायकों में से महज 4 ब्राह्मण एमएलए हैं। गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से सुनील शर्मा विधायक हैं और प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। इनके अलावा संजीव शर्मा गाजियाबाद के विधायक हैं। बुलंदशहर जिले की अनूपशहर सीट से संजय शर्मा भाजपा के विधायक हैं। इनके अलावा बुलंदशहर की शिकारपुर सीट से अनिल शर्मा बीजेपी के विधायक हैं। एमएलसी की बात करें तो महज 2 एमएलसी पूरे वेस्ट यूपी में हैं। एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा गौतमबुद्ध नगर से और धर्मेंद्र भारद्वाज मेरठ से आते हैं। धर्मेंद्र भारद्वाज स्थानीय निकाय के एमएलसी हैं जबकि श्रीचंद्र शर्मा शिक्षक एमएलसी हैं। सहारनपुर में राघव लखनपाल क्यों हारे ?
ब्राह्मणों को हाशिए पर धकेले जाने के बाद अब सहारनपुर में ब्राह्मण नेता राघव लखनपाल के लोकसभा चुनाव हारने का मुद्दा भी उछल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनकी हार के पीछे भी पार्टी की भितरघात थी। जातीय आधार पर कुछ लोगों ने राघव लखनपाल का विरोध किया। ठाकुर नेताओं की ओर से राघव लखनपाल के विरोध की बातें सामने आ रही हैं। पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन सभी चीजों का रिएक्शन आने वाले विधानसभा चुनावों में नजर आ सकता है। मुरादाबाद में 60 फीसदी मुस्लिम वोटर्स वाली सीट से ब्राहम्मण नाखुश मुरादाबाद में भी 6 विधानसभा सीटों में एक सीट मुरादाबाद ग्रामीण पर भाजपा ब्राह्मण नेता को चुनाव लड़ाती है। इस सीट को एक तरह से ब्राह्मणों के लिए रिजर्व कर दिया गया है। लेकिन ब्राह्मण नेताओं का कहना है कि 60 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोटों वाली सीट उनके हिस्से में क्यों डाली गई है? ऐसा सिर्फ ब्राह्मण नेताओं को टिकट बंटावारे की सूची में प्रतिनिधित्व दर्शाने के लिए किया गया है। वास्तव में यदि ब्राह्मणों को प्रतिनिधित्व दिया जाना है तो उनकी सीट चेंज होना चाहिए। मुरादाबाद में मेयर और विधायक दोनों वैश्य समाज से आते हैं। ब्राह्मण नेता इनमें से किसी एक सीट को अपने लिए छोड़े जाने की मांग उठा रहे हैं। इसी तरह बिजनौर में पूर्व एमएलसी सुबोध पाराशर भी पार्टी में हाशिए पर जाने से विचलित होने की खबरें सामने आ रही हैं। वेस्ट यूपी भाजपा में जाट नेताओं का दबदबा वेस्ट यूपी में 50 फीसदी जिला पंचायत अध्यक्ष जाट वेस्ट यूपी के 14 जिलों में से 13 जिलों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। ये तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी सत्ताधारी दल की ही होती है। जिसे सत्ताधारी दल चाहता है वही इन कुर्सियों पर बैठता है। आंकड़ों पर गौर करें तो वेस्ट यूपी में भाजपा के 13 जिला पंचायत अध्यक्षों में से 6 जिला पंचायत अध्यक्ष जाट बिरादरी से हैं। यदि ब्लॉक प्रमुखों को भी इसमें जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा कहीं अधिक हो जाएगा। आंकड़े ये बताते हैं कि वेस्ट यूपी में भाजपा के भीतर फन फैला रहा जातीय असंतोष बेवजह नहीं है। जिन नेताओं पर यहां जातीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी थी उन्होंने आंख मूंदकर यहां अपनी-अपनी जाति-बिरादरी को सियासत में सेट करने के जतन किए। रिश्तेदारों को भी सियासत में ढंग से सेट किया गया है।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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