राजगीर जू सफारी को वन्यजीवों के लिहाज से और भी अधिक समृद्ध और आकर्षक बनाने की योजना तैयार कर ली गई है। पटना जू की तर्ज पर अब राजगीर में गैंडों के लिए सैटेलाइट ब्रीडिंग सेंटर और शेरों के लिए अलग से कंजर्वेशन-ब्रीडिंग सेंटर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही ऐतिहासिक घोड़ाकटोरा झील और राजगीर की पांचों पहाड़ियों पर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर मुहर लग गई है। सफारी में आएंगे नए वन्यजीव, बनेगा अत्याधुनिक पक्षी विहार सफारी में पर्यटकों के रोमांच को बढ़ाने के लिए गौर और चिंकारा जैसे नए वन्यजीव लाए जाएंगे। विदेशी तर्ज पर पक्षियों के लिए एक अत्याधुनिक ‘बर्ड एवेरी’ (पक्षी विहार) का निर्माण किया जाना है। वहीं, वन्यजीवों के बेहतर स्वास्थ्य और इलाज के लिए सफारी के वर्तमान अस्पताल को आधुनिक उपकरणों से लैस कर इसे देश के एक अनूठे वन्यजीव अस्पताल का रूप दिया जाएगा। घोड़ाकटोरा में मोटर बोटिंग और रास्ते में बनेगा डियर पार्क ऐतिहासिक घोड़ाकटोरा को एक प्रमुख आकर्षण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए मास्टर प्लान के तहत काम होगा। इसके लिए एक मास्टर कंसल्टेंट की बहाली की जाएगी। योजना के अनुसार, घोड़ा कटोरा झील की उड़ाही कर इसे और गहरा किया जाएगा, जिससे वहां मोटर बोटिंग और विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू की जा सकें। पर्यटकों की सुविधा के लिए झील परिसर में नया कैफेटेरिया, चिल्ड्रन पार्क, एक्टिविटी सेंटर और निर्बाध बिजली की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, घोड़ा कटोरा जाने वाले रास्ते में छह किलोमीटर के दायरे में एक नया डियर पार्क (हिरण पार्क) भी विकसित किया जाएगा।
पांचों पहाड़ियों पर ‘वन मित्र’ और डोली चालकों को मिलेगी वर्दी राजगीर की पांचों पहाड़ियों (वैभवगिरी, विपुलगिरी, रत्नागिरी, उदयगिरी और सोनगिरी) पर स्थित जैन, बौद्ध और हिंदू धर्मस्थलों के विकास पर विशेष फोकस है। वैभवगिरी पर्वत को हेरिटेज इको-टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा और प्राचीन सिद्धनाथ मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएंगी। पर्यटकों को सुरक्षित रूप से पहाड़ियों तक पहुंचाने के लिए ‘गाइडेड टूर’ की सुविधा मिलेगी और जगह-जगह ‘वन मित्र’ काउंटर खोले जाएंगे। वन विभाग पहाड़ियों पर जाने वाले डोली (पालकी) चालकों का विधिवत निबंधन कर उन्हें वर्दी और सुरक्षित स्टैंड मुहैया कराएगा। प्राचीन स्मारकों और गुफाओं का होगा जीर्णोद्धार राजगीर के प्राचीन और भूले-बिसरे स्मारकों को भी सहेजने की तैयारी है। चीनी यात्री फाह्यान द्वारा वर्णित घोड़ा कटोरा के समीप स्थित इंद्रशाला गुफा को संवारने के लिए मास्टर प्लान बनेगा। विपुलगिरी पर्वत पर स्थित जरासंध स्तूप और सारिपुत्र स्तूप का जीर्णोद्धार कर पर्यटकों की पहुंच को आसान बनाया जाएगा। गुरु नानक मंदिर के समीप प्राचीन गणेश मड़ैया की सीढ़ियों का निर्माण, मगध मिलिट्री बंकर का विकास और जरादेवी मंदिर से रोपवे तक एक शानदार पाथवे का निर्माण भी प्रस्तावित है। जाम से मिलेगी मुक्ति, बनेगा ‘पीपल-बरगद कॉरिडोर’ शहर को भारी और व्यावसायिक वाहनों के दबाव से मुक्त करने के लिए 200 करोड़ रुपए की लागत से एक नई फोरलेन सड़क का निर्माण होगा। यह सड़क बाणगंगा से पहाड़ के पीछे होते हुए गिरियक, मोतनाजे, आयुध निर्माणी से गुजरकर सीधे नारदीगंज तक जाएगी।
इससे गयाजी या नवादा जाने वाले व्यावसायिक वाहन बिना राजगीर शहर में प्रवेश किए निकल सकेंगे। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण के दृष्टिकोण से बोधगया से राजगीर तक जाने वाले मार्ग के दोनों ओर पौधे लगाकर इसे दुनिया के पहले ‘पीपल-बरगद कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। नेशनल टूर पैकेज से जुड़ेगा राजगीर विदेशी और दूरदराज के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए राजगीर को नेशनल टूर पैकेज में शामिल किया जाएगा। वन विभाग के अधिकारी 25 से 27 फरवरी तक दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित होने वाले पर्यटन मेले में हिस्सा लेकर बड़े टूर ऑपरेटरों के साथ इन विकास कार्यों को साझा करेंगे। पर्यटकों के लिए पहाड़ियों पर नाइट कैंपिंग और ट्रैकिंग की भी शुरुआत होगी। साथ ही, शहर को धूल-मुक्त रखने के लिए पानी छिड़कने वाले विशेष वाहन भी खरीदे जाएंगे।
https://ift.tt/Fl4GvRB
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live