पटना पशु शल्य चिकित्सालय में तैनात है कंपाउंडर, फर्जी डॉक्टर, अस्पतालों की सूची मांगी
कुढ़नी प्रखंड की सोनबरसा पंचायत में चल रहे एक निजी पशु अस्पताल पर कार्रवाई ने कई परतें खोल दी हैं। पशुपालन विभाग का एक कंपाउंडर कथित तौर पर ड्यूटी के दौरान ही निजी क्लिनिक संचालित कर रहा था। छापेमारी में बिहार सरकार अंकित दवा का डिब्बा मिला। हालांकि, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार मेहता ने बताया कि डिब्बा में दवा नहीं मिली, लेकिन सरकारी सामग्री की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सरकारी दवाओं को ऊंची कीमत पर बेचकर पशुपालकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा था। छापेमारी में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि पशुपालन विभाग का ही एक कर्मी इस निजी अस्पताल का संचालन कर रहा था। वहीं, छापेमारी के लिए गई पशुपालन विभाग की टीम के सामने पशुपालकों का आक्रोश फूट पड़ा। उनका कहना था कि निजी अस्पतालों में दवाएं महंगे दाम पर बेची जाती हैं। कई बार बिना पंजीकरण के इलाज किया जाता है। सोनबरसा पंचायत में घर की दीवार पर निजी पशु चिकित्सा केंद्र लिखा है। इस पर बीके प्रसाद आरएमपी (वेट) लिखा है। बीके प्रसाद लिखे नाम के आगे डॉक्टर लिखा था, जिसे मिटा दिया गया है। छापेमारी के दौरान कंपाउंडर अस्पताल में मौजूद नहीं मिला। मोबाइल पर संपर्क करने पर उसने स्वयं को ड्यूटी पर होने की बात कही। इस संबंध में पटना सिटी अनुमंडलीय पशु चिकित्सालय के प्रभारी से उसकी उपस्थिति विवरणी मांगी गई है। उपस्थिति रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डॉ. मेहता ने बताया कि यदि सरकारी पद पर रहते हुए निजी प्रैक्टिस और सरकारी दवाओं की बिक्री की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर अनुशासनहीनता और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आएगा।
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