जहानाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जहाँ सामाजिक एकता, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर चर्चा की गई। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित करना और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। हिंदू समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होता जा रहा सम्मेलन को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख अनिल ठाकुर ने कहा कि वर्तमान हिंदू समाज अपनी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं से दूर होता जा रहा है। उन्होंने संयुक्त परिवार की परंपरा के कमजोर पड़ने और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की। ठाकुर ने कहा कि परिवारों के टूटने से संस्कारों में भी गिरावट आ रही है, जिसका प्रभाव नई पीढ़ी पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। चरित्र और संस्कारों की जा रही अनदेखी उन्होंने आधुनिक तकनीक और मोबाइल फोन के उपयोग पर भी बात की। ठाकुर ने कहा कि जहाँ ये ज्ञान और सुविधा के माध्यम हैं, वहीं कुछ लोग इनका दुरुपयोग कर गलत आचरण की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समाज शिक्षित तो हो रहा है, लेकिन चरित्र और संस्कारों की अनदेखी की जा रही है। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन भी उतना ही आवश्यक है। परिवार संगठित रहेगा, तभी समाज में संस्कारों का विकास होगा अनिल ठाकुर ने लोगों से परिवार को एकजुट रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब परिवार संगठित रहेगा, तभी समाज में अच्छे संस्कारों का विकास होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि देश को कमजोर करने वाली बाहरी शक्तियां सक्रिय हैं, इसलिए समाज को एकजुट रहकर राष्ट्र की रक्षा के लिए सजग रहना चाहिए। सम्मेलन के समापन पर उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
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