बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने विधानसभा में घोषणा की कि अब राज्य में खुले में मांस और मछली की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि मांस बेचने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का तर्क है कि इससे व्यवस्था सुधरेगी और कानून का पालन सुनिश्चित होगा, लेकिन सरकार के अंदर से ही इस फैसले पर सवाल उठ गया है। जदयू के एमएलसी खालिद अनवर ने दो टूक कहा कि छोटे व्यापारियों पर लाइसेंस का बोझ डालना गलत है। उन्होंने कहा कि बिहार में हजारों लोग मांस और मछली बेचकर अपना घर चलाते हैं। लाइसेंस की जरूरत नहीं, खालिद अनवर का विरोध कहा कि जिस तरह दूध बेचने वालों को लाइसेंस की जरूरत नहीं होती, उसी तरह मांस-मछली बेचने वालों को भी इसकी जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह नीतीश कुमार का बिहार है, यहां कोई तानाशाही नहीं चलती। कोई कुछ बोल दे और सबको मानना पड़े, ऐसा नहीं होगा। उनके इस बयान को सरकार के भीतर खुली असहमति के रूप में देखा जा रहा है। शराबबंदी पर भी सख्त रुख इधर, उपेंद्र कुशवाहा के विधायक ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की बात कही। इस पर भी खालिद अनवर ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी पर किसी समीक्षा की जरूरत नहीं है। जिसे दिक्कत है, वह अपना रास्ता देख लें, कहकर उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी अपने रुख पर कायम है।
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