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छात्रा का अपहरण; इंजेक्शन देकर किया बेहोश, होश आने पर चंगुल से बच निकली

क्राइम रिपोर्टर|मुजफ्फरपुर सकरा थाना क्षेत्र के एक गांव की 16 वर्षीय किशोरी का शुक्रवार को अपहरण कर लिया गया। हालांकि, सूझबूझ और साहस दिखाते हुए वह अपहर्ताओं के चंगुल से बच कर निकल गई। इससे पहले 17 फरवरी को भी अपहरण का प्रयास हुआ था। वह सरकारी स्कूल में 9वीं की छात्रा है। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे स्कूल से समोसा खरीदने के लिए बाहर निकली थी। समोसा नहीं मिलने पर वह चॉकलेट लेकर लौट रही थी, तभी पीछे से तेज रफ्तार काली थार गाड़ी आकर उसके सामने रुकी। छात्रा के मुताबिक, गाड़ी से गमछा से चेहरा ढंके दो युवक उतरे और उसका मुंह दबाकर गाड़ी में बैठा लिया। थार में पहले से एक महिला और चालक मौजूद थे। महिला के गाल पर मस्सा था और उसका चेहरा खुला था, जबकि अन्य सभी का चेहरा ढंका था। छात्रा के बाएं हाथ में इंजेक्शन दिया गया, जिससे वह बेहोश हो गई। होश आने पर उसने खुद को शहर में पाया। थार की डिक्की का गेट हल्का खुला था। फायदा उठाकर वह बाहर निकली और दौड़ते हुए भागी। दो युवकों ने उसका पीछा किया, लेकिन उनकी पकड़ में नहीं आई। इसलिए डर से वे फरार हो गए। 15 मिनट पैदल चलकर छात्रा धर्मशाला चौक स्थित संतोषी माता मंदिर के समीप पहुंची और दूसरे का मोबाइल मांगकर अपनी मां को फोन कर जानकारी दी। फिलहाल, पुलिस मानव तस्करी गिरोह के संभावित नेटवर्क, गाड़ी के रूट और संदिग्धों की पहचान पर काम कर रही है। मुजफ्फरपुर | मीनापुर स्थित गंज बाजार की तीन किशोरियां दिल्ली जाने के लिए शुक्रवार को मुजफ्फरपुर पहुंचीं। तीनों परिजन को बिना बताए जंक्शन पर पहुंची थीं। तीनों दोपहर से लेकर शाम तक जंक्शन पर रही। तीनों दिल्ली जाने वाली ट्रेन के बारे में पता कर रही थीं। इस दौरान रेल पुलिस के जवानों ने नजर उनपर पड़ी। महिला पुलिस अधिकारी ने तीनों बच्चियों से पूछताछ की। तीनों ने बताया कि वे स्थानीय सरकारी स्कूल में सातवीं की छात्रा हैं। कमाने के लिए दिल्ली जाना चाहती हूं। हमलोगों के परिजन मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। 13 से 14 वर्ष तक की छात्राओंे के मिलने की सूचना पर रेल थानाध्यक्ष रंजीत कुमार ने जांच शुरू की। मानव तस्करी की बात सामने नहीं आयी। सूचना पर तीनों के परिजन रेल थाना पहुंचे। इसमें दो सगी बहन व एक पड़ोस की लड़की थी। रेल थानेदार रंजीत कुमार ने बताया कि पूछताछ के बाद तीनों छात्राओं को परिजन को सौंप दिया गया। तीनों पहली बार बिना परिजन के घर से निकलकर शहर आयी थीं। छात्रा के चाचा नगर थाने पहुंचे। भतीजी को सुरक्षित देखकर फफक पड़े। छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसके पिता दिल्ली की एक दाल कंपनी में मिस्त्री हैं। वह रोज की तरह सुबह नौ बजे स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। छात्रा के परिजनों के मुताबिक, 17 फरवरी को भी कोचिंग से लौटने के दौरान अपहरण का प्रयास हुआ था। एक कार से तीन पुरुष और एक महिला ने मास्क पहन कर हथियार के बल पर उसे पकड़ने का प्रयास किया था। आरोपितों ने उसकी नाक की नथिया व चांदी की ताबीज छीन ली थी। छात्रा की मां ने बताया कि सकरा थाने में एफआईआर के लिए आवेदन दिया था, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। किसी अपहर्ता की पहचान नहीं हो सकी। जांच के नाम पर पुलिस लौटा रही थी। इधर, नगर पुलिस ने सकरा थाने को सूचना दी है।


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