बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की तैयारी अब तेज होती दिख रही है। राज्य सरकार इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बुनियादी इंतजामों पर तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पटना के विद्युत भवन में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें प्लांट के लिए सालभर पानी की उपलब्धता और जल स्रोत से जुड़ी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। सालभर पानी कैसे मिलेगा, इस पर मंथन न्यूक्लियर पावर प्लांट के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि प्लांट को पूरे साल बिना रुकावट पानी कैसे उपलब्ध कराया जाए। बैठक में तय किया गया कि जल उपलब्धता और उससे जुड़ी अवसंरचना की विस्तृत योजना बनाई जाएगी। बीएसपीजीसीएल की टीम ने संभावित स्थलों का निरीक्षण कर लिया है और जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी और सिंचाई से जुड़े पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया है। साथ ही, अन्य विकल्पों का भी विभागीय स्तर पर मूल्यांकन जारी है। सरकार का आश्वासन: हर संभव सहयोग ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने साफ कहा कि, ‘राज्य सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर सहयोग देगी।’ उन्होंने कहा कि, ‘यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्लांट के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थल चुना जाए और सालभर पानी की आपूर्ति बाधित न हो। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में सुरक्षित और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए।’ बांका, नवादा और सीवान जिलों में हुआ सर्वे परियोजना के लिए संभावित स्थलों का प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया गया है। बांका जिले के शंभूगंज और भितिया इलाकों में सर्वे किया गया। नवादा जिले के रजौली क्षेत्र में भी टीम ने निरीक्षण किया। वहीं सीवान जिले में भी प्रारंभिक सर्वे और भू-आकलन का काम चल रहा है। बैठक के दौरान एनपीसीआईएल और एनटीपीसी की टीम ने इन स्थलों की संभावनाओं पर अपना संक्षिप्त प्रेजेंटेशन भी दिया। क्या बदलेगा बिहार का ऊर्जा परिदृश्य? अगर यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। न्यूक्लियर पावर प्लांट से राज्य को दीर्घकालिक और स्थिर बिजली उत्पादन का विकल्प मिलेगा, जिससे उद्योग और विकास को भी रफ्तार मिल सकती है। फिलहाल, सरकार पानी और बुनियादी ढांचे से जुड़े मसलों को सुलझाने पर फोकस कर रही है, ताकि आगे की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके। बैठक की अध्यक्षता ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह ने की। इस दौरान बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (बीएसपीजीसीएल) के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल), एनटीपीसी लिमिटेड (एनटीपीसी), जल संसाधन विभाग और अन्य वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
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