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डाक टिकटों में दिखी इतिहास-संस्कृति की झलक:‘बोधिपेक्स–2026’ में उमड़ी युवाओं-स्टूडेंट्स की भीड़, फिलेटली पर कार्यशालाएं हुई

गयाजी में डाक टिकट संग्रहण को लेकर नई जागरूकता और उत्साह देखने को मिली। लोगों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने और युवाओं में इतिहास व संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय फिलेटली प्रदर्शनी ‘बोधिपेक्स–2026’ का भव्य शुभारंभ हरिहर सेमिनरी स्कूल के प्रेक्षागृह में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार परिमंडल, पटना के मुख्य डाक महाध्यक्ष एम.यू. अब्दाल्ली ने किया। यहां डाक टिकटों में इतिहास-संस्कृति की झलक दिखी। आयोजन गया मंडल के वरिष्ठ डाक अधीक्षक अंशुमान के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें विद्यार्थियों, युवा संग्रहकों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि डाक टिकट केवल पत्र भेजने का साधन नहीं हैं, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक घटनाओं, महापुरुषों और राष्ट्रीय उपलब्धियों का जीवंत दस्तावेज हैं। राष्ट्र निर्माण के प्रति समझ विकसित होती फिलेटली के माध्यम से नई पीढ़ी में इतिहास, कला और राष्ट्र निर्माण के प्रति समझ विकसित होती है। प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों पर आधारित दुर्लभ और आकर्षक डाक टिकटों, विशेष आवरणों और थीमैटिक संग्रहों को प्रदर्शित किया गया। स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संस्कृति, वन्यजीवन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े संग्रह लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। उद्घाटन अवसर पर ‘बोधिपेक्स–2026’ पर आधारित एक विशेष आवरण का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में गया के महापौर बीरेन्द्र कुमार पासवान और मगध प्रमंडल के सचिव (कमिश्नर) सुनील कुमार भी मौजूद रहे। आयोजन के दौरान फिलेटली पर कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और नए डाक टिकट खातों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई, जिससे युवाओं को इस क्षेत्र से जुड़ने का अवसर मिला। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी आयोजन में रंग भर दिया। सुमधुर संगीत, मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों के साथ बच्चों के लिए “सिट एंड ड्रॉ” प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। दो दिवसीय इस आयोजन ने गया और आसपास के क्षेत्रों में डाक टिकट संग्रहण के प्रति नई ऊर्जा और रुचि पैदा की है। कार्यक्रम की सफलता में डाक विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं को रचनात्मक दिशा देने के साथ-साथ उन्हें देश की विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेंगे।


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