अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विस्तार के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) पटना के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान हुआ। इस साझेदारी से एम्स पटना में इलाज कराने वाले मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। एआई आधारित तकनीक से डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी और अन्य लैब रिपोर्ट का तेजी से और अधिक सटीक विश्लेषण कर सकेंगे। इससे कैंसर, दुर्घटना से जुड़ी चोटों और अन्य जटिल रोगों की शुरुआती पहचान संभव होगी, जिससे समय पर उपचार शुरू किया जा सकेगा। डेटा आधारित इंटेलिजेंट सिस्टम उच्च जोखिम वाले मरीजों की पहचान कर उनकी निगरानी और देखभाल की योजना बनाने में मदद करेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट और अस्पताल प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे मरीजों का इंतजार समय कम होगा। साथ ही, मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों से मेडिकल डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को एआई टूल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा एमओयू के तहत, एम्स पटना, सी-डैक मोहाली और नोएडा के सहयोग से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशल पर्पस हब (एआई-एसपीएच) स्थापित करेगा। यह हब स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में कार्य करेगा। यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को एआई टूल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संक्रमण रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, ट्रॉमा केयर और गैर-संचारी रोगों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा। यह हब बिहार और झारखंड के मेडिकल कॉलेजों के लिए नोडल केंद्र की भूमिका निभाएगा और सुरक्षित डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली के विकास में योगदान देगा। इस समझौते के दौरान एम्स पटना की ओर से उपनिदेशक (प्रशासन) नीलोत्पल बल, फैकल्टी इंचार्ज (आईटी) डॉ. अभ्युदय कुमार और उप फैकल्टी इंचार्ज (आईटी) डॉ. पल्लम गोपी चंद उपस्थित थे। सी-डैक पटना से केंद्र प्रमुख अभिनव दीक्षित और साइंटिस्ट-डी साकेत कुमार झा मौजूद रहे। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन और संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव भी शामिल हुए। एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं में परिवर्तनकारी कदम बताते हुए कहा कि यह पहल बेहतर इलाज, उन्नत शोध और क्षेत्रीय तकनीकी क्षमता के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह साझेदारी पूर्वी भारत में आधुनिक, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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