‘कुत्ता काटने से कोई कैसे मर सकता है… मेरा छोटा बेटा अक्सर शराब पीता था। बड़े बेटे के तिलक वाले दिन भी उसने शराब पी होगी। मुझे लगता है, शराब पीने से ही तीनों की मौत हुई है।’ ये कहना है मृतक लालू के पिता राजपूजन सिंह का, जिसके छोटे बेटे की 16 फरवरी को अचानक मौत हो गई। वहीं, इस मामले में घरवालों का कहना है, लालू को 14 फरवरी की रात कुत्ता काटा था। इसकी वजह से उसकी तबीयत बिगड़ गई और 2 दिन बाद डेथ हो गई। दरअसल, रोहतास में 16 से 18 फरवरी के बीच 72 घंटे के अंदर 5 लोगों की मौत हो गई है। इसमें से 3 की मौत एक ही परिवार से हुई है। मृतकों में रोहतास के मठिया गांव निवासी लल्लू सिंह, नासरीगंज के बड़की सबदला गांव के अभिजीत सिंह, भोजपुर के गरहथा गांव निवासी राहुल कुमार और अकोढ़ीगोला थाना क्षेत्र के दो बावर्ची शामिल हैं। इन सभी की मौत भले ही अलग-अलग जगहों पर हुई हो, मगर तिलक समारोह में मौजूद होना एक समान कड़ी के रूप में सामने आया है। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… 14 फरवरी को था तिलक समारोह रोहतास के बिक्रमगंज प्रखंड अंतर्गत मठिया गांव में 14 फरवरी की रात राजपूजन सिंह के बड़े बेटे का तिलक समारोह था। आसपास के गांवों से रिश्तेदारों और परिचितों का आना-जाना लगा था। सभी लोग तिलक समारोह में खूब मजे किए। खाना-पीना, रस्में सब कुछ शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। इसके बाद शनिवार की देर रात लोग अपने-अपने घरों को लौट गए। लेकिन 15 फरवरी की सुबह पता चला कि शादी में शामिल हुए लड़के का छोटा भाई लल्लू, ममेरा भाई राहुल और अभिजीत सिंह तीनों बीमार हो गया है। डॉक्टर की जगह झाड़फूंक वाले के पास ले गए दूल्हे के घरवालों का कहना था, 14 फरवरी की रात लल्लू अपने रिश्तेदारों को छोड़ने गया था। 15 फरवरी की सुबह वो घर आ रहा था, तभी कुत्ते ने उसे काट लिया। इसकी वजह से 15 फरवरी से उसकी तबीयत बिगड़ी और 16 फरवरी को उसकी मौत हो गई। लल्लू के भाई का कहना है, हमलोग उसे झाड़-फूंक वाले के पास लेकर गए थे। लेकिन वो भाई को नहीं बचा पाया। लल्लू का हमने पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया था। सीधे उसका अंतिम संस्कार कर दिया। एक ही घर के लोगों का अलग-अलग बयान मृतक के पिता राजपूजन सिंह ने बताया, लल्लू जब अपने रिश्तेदारों को छोड़ने जा रहा था तो उसके साथ राहुल और अभिजीत दोनों कार में मौजूद थे। अब इनलोगों ने शराब पीया की क्या किया, इसकी हमें जानकारी नहीं है। हालांकि, सब कम उम्र के लड़के थे और तीनों दोस्त भी थे। अक्सर साथ में बैठकी कर शराब पीते थे। हो सकता है शराब पीने से तीनों की मौत हुई हो। ग्रामीण राकेश बताते हैं, लल्लू की मौत के बाद हमने सूचना मिली की उसके ममेरे भाई राहुल और गांव के अभिजीत की भी मौत हो गई है। दोनों की भी तबियत बिगड़ने के बाद मौत हुई है। शराब पीने से नहीं किडनी खराब होने से गई जान वहीं, ग्रामीण राम आशीष ने बताया, हमारे गांव के बेटे की शादी थी। हमलोग काम में व्यस्थ थे। सभी कार्यक्रम रात 10 बजे तक खत्म हो गया था। हमलोग घरवालों को खाना खिलाने लगे। इसी दौरान लल्लू अपने ममरे भाई और दोस्त के साथ रिश्तेदारों को छोड़ने चला गया। वहां, से दूसरे दिन लौटा तो तीनों की तबियत खराब हो गई थी। इसमें से लल्लू की कुत्ता के काटने से मौत हुई है। वहीं, अभिजीत किडनी खराब था। उसकी तबीयत अक्सर खराब रहती थी। गांव में जो शराब पीने से मौत वाली बात है, वो अफवाह झूठी है। बच्चों ने शराब नहीं पीया था। वहीं, एक परिजन ने कहा मौत का शराब से क्या लेना-देना? ये सब शरीर खराब होने से हुआ है। गांव में चर्चा है कि तिलक में खाना बनाने आए अकोढ़ीगोला थाना क्षेत्र के दो रसोइयों की भी घर लौटने के बाद मौत हो गई है। हालांकि, दो रसोइयों की मौत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, मगर गांव में यह बात तेजी से फैल गई है। उत्पाद विभाग को घर से नहीं मिला कोई सुराग सोशल मीडिया पर जहरीली शराब की चर्चा के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त तारिक महमूद के नेतृत्व में टीम ने मठिया गांव पहुंचकर परिजनों से पूछताछ की। टीम ने शराब, केमिकल या किसी जहरीले पदार्थ के सेवन की संभावना को भी खंगाला। हालांकि, अभी तक किसी भी तरह का ठोस सबूत नहीं मिला है। उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त तारिक महमूद ने बताया, सासाराम में 2 की मौत की सूचना मिली थी। हमलोग छानबीन करने लड़के के घर पर पहुंचे, लेकिन वहां से कुछ बरामद नहीं हुआ है। वहीं, रोहतास के एसपी रौशन कुमार ने कहा, मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। इन मौतों के पीछे क्या कारण है, यह जांच प्रतिवेदन आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। एसपी ने इसके लिए एक विशेष जांच टीम गठित की है, जो परिजनों, ग्रामीणों और तिलक समारोह से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। कैसे शराब बन जाती है जहरीली? दरअसल कच्ची शराब को जब ज्यादा नशीला बनाने के लिए कैमिकल मिलाते हैं तो ये जहरीली हो जाती है। देसी शराब बनाने के लिए पहले गुड़, शीरा से लहान तैयार करते हैं और फिर इस मिट्टी में दबा दिया जाता है। इसे ज्यादा नशीला बनाने के लिए इसमें यूरिया, बेसरमबेल और ऑक्सीटोसिन मिलाते हैं। यही मिलावट मौत का कारण बनती है। क्यों देसी शराब पीने से हो जाती है मौत? नई दिल्ली, एम्स से डीएम कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संजय चुघ कहते हैं कि देसी शराब में अमोनियम नाइट्रेट (यूरिया) और ऑक्सीटोसिन मिलाने से मेथेनॉल (मिथाइल एल्कोहल) बन जाता है। यही बाद में मौत का कारण बनता है। मेथेनॉल की अधिकता से शराब टॉक्सिक बन जाती है। इसके बाद मेथेनॉल जब शरीर में मेटाबोलाइज होता है तो वो फार्मेल्डिहाइड बनाता है और बाद में फॉर्मिक एसिड बन जाता है, जो कि जहर है। इसके शरीर में जाते ही ब्रेन और आंख सबसे पहले प्रभावित होती हैं। इसके बाद बॉडी के दूसरे ऑर्गन काम करना बंद कर देते हैं और व्यक्ति की मौत हो जाती है। मेथेनॉल की कितनी मात्रा खतरनाक होती है? 15 से 500 ML तक की मात्रा लेने पर व्यक्ति की मौत हो जाती है। ऑक्सीटोसिन से नपुंसकता का खतरा देसी शराब को ज्यादा नशीला बनाने के लिए ऑक्सीटोसिन भी मिलाया जाता है। स्टडी में पता चला है कि ऑक्सीटोसिन से नपुंसकता और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियाें का खतरा रहता है। ऑक्सीटोसिन के सेवन से आंखों और पेट में जलन होती है। आंखों की रोशनी भी जा सकती है। जहरीली शराब पीने वाले का इलाज क्या है? डॉक्टर चुघ कहते हैं कि खास बात है कि जहरीली शराब का इलाज भी शराब (ऐथेनॉल) ही है। इसके अलावा फॉमीपीजोल दवा भी कारगर है। मेथेनॉल के जहर का इलाज एथेनॉल है। जहरीली शराब के एंटीडोट के तौर पर टैबलेट भी मिलते हैं, लेकिन भारत में इनकी उपलब्धता कम है। जहरीली शराब पीने वाले व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाने की जरूरत होती है। इसके बाद जहर को शरीर से निकालने के लिए मरीज का डायलिसिस भी करना पड़ सकता है। मरीज का सिर्फ सपोर्टिव इलाज ही होता है। जैसे- ऑक्सीटोसिन को ठीक करना और मेथाइल एल्कोहल के लिए एंटीडोट देना। कई बार मरीज के पेट की धुलाई (स्टमक वॉश) भी मददगार हो सकता है, लेकिन यदि उसे भर्ती कराने में देर हो गई है तो इसका कोई फायदा नहीं है।
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