KGMU प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। आरोप है कि चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्मिकों का नियम विरुद्ध रेगुलराइजेशन (नियमितीकरण) और प्रमोशन किया। इस मामलों को सदन की कार्रवाई के दौरान विधान परिषद में भी उठाया गया। इसके बाद शासन की तरफ से इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेष सचिव की अगुआई में जांच बैठाई गई है। जारी हुआ यह आदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव सारिका मोहन की तरफ से जारी किए गए आदेश में कहा गया कि तदर्थ नियुक्ति पाने वाले सैय्यद अख्तर अब्बास समेत अन्य कर्मिकों को बिना विनियमित किए ही स्थायीकरण और पदोन्नति देने और फिर रिटायरमेंट लाभ सहित पेंशन लाभ देने के मामले में जांच के लिए शासन ने समिति का गठन किया है। इस समिति में विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग की कृतिका शर्मा को जांच समिति का अध्यक्ष और चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्त नियंत्रक को इसका सदस्य बनाया गया है। समिति को निष्पक्ष जांच पूरी कर रिपोर्ट सहित आख्या शासन को सबमिट करने को कहा गया है। KGMU अधिनियम की धारा-13 के अतर्गत जांच बैठाई शासन की तरफ से बैठाई गई इस जांच में KGMU अधिनियम की धारा 13 का भी उल्लेख किया गया है। शासन की तरफ से निष्पक्ष जांच पूरी कर जांच समिति के अध्यक्ष को रिपोर्ट सब्मिट करने को कहा गया है।
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