कैफे संचालक की लापरवाही ने एक युवती के कॅरियर और सपनों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। फर्जी ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाण पत्र के चलते नर्सिंग अफसर पद पर चयन के बाद भी उसकी नौकरी चली गई। अब उसकी तहरीर पर पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ग्वालटोली निवासी कोमल श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में लोक सेवा आयोग की ओर से निकाली गई स्टाफ नर्स भर्ती के लिए आवेदन किया था। आवेदन के दौरान उन्होंने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र लगाया था, जिसे ग्वालटोली स्थित दादा प्वाइंट कैफे के संचालक अंकित से बनवाया था। उसने1500 रुपये फीस ली थी। यह प्रमाण पत्र 11 सितंबर 2023 को जारी हुआ था। चयन के बाद जांच में खुली पोल लोक सेवा आयोग ने 7 मार्च 2025 को भर्ती का परिणाम घोषित किया, जिसमें कोमल का नर्सिंग अफसर पद पर चयन हो गया। इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ।
19 नवंबर 2025 को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय की ओर से ई-मेल के जरिए सूचना दी गई कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र फर्जी है। सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया। जब कोमल तहसील पहुंचीं तो वहां भी प्रमाण पत्र फर्जी होने की पुष्टि हो गई। इसके चलते उनका चयन निरस्त हो गया। मानसिक रूप से टूट चुकी है पीड़िता पीड़िता का आरोप है कि कैफे संचालक की लापरवाही और धोखाधड़ी के कारण उनकी नौकरी नहीं लग सकी। इस घटना के बाद से उनकी मानसिक हालत खराब है और वह गहरे तनाव में हैं। पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा थाना प्रभारी संजय गौड़ ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर धोखाधड़ी समेत अन्य संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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