नगर पालिका की हरियाली योजना सवालों के घेरे में आ गई है। लगभग नौ महीने पहले नगर पालिका के निर्माण विभाग ने शहर की मुख्य सड़कों के किनारे फुटपाथ पर लाखों रुपये की लागत से पौधरोपण कराया था। हालांकि, पौधे लगाने के बाद संबंधित विभाग ने उनकी देखभाल पर ध्यान नहीं दिया। नियमित सिंचाई और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में अधिकांश पौधे सूख गए। कई पौधे टूट गए, और कुछ स्थानों पर पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के गार्ड भी उखाड़कर चोरी कर लिए गए। यह स्थिति सरकारी धन की बर्बादी और संपत्ति को नुकसान का एक उदाहरण है। संत शिरोमणि गेस्ट हाउस के सामने भी यही स्थिति देखी गई, जहां अधिकारी, जनप्रतिनिधि और मंत्री लगातार आते-जाते रहते हैं। यहां भी पौधे सूख गए हैं और लोहे के घेरे गायब हैं। यह दर्शाता है कि अधिकारियों की निगरानी के बावजूद पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई। इस परियोजना में सरकारी धन की बर्बादी हुई है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा है। हैरानी की बात यह है कि समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण का दावा करने वाले गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी इस मामले पर खामोश हैं। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश त्रिपाठी ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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