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डीपफेक से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले:विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने डिजिटल दुनिया के खतरों पर आगाह किया

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ‘डीपफेक इन डिजिटल मीडिया’ पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीटीआई दिल्ली के मुख्य उप संपादक गौरव ललित ने छात्र-छात्राओं को डिजिटल दुनिया के खतरों से आगाह किया। गौरव ललित ने कहा कि वर्तमान दौर में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूचना की सत्यता को बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग के माध्यम से अब किसी भी व्यक्ति का हूबहू डिजिटल अवतार तैयार किया जा सकता है, जिससे वास्तविकता और कल्पना के बीच का अंतर मिटता जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि डीपफेक के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ये मामले न केवल लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि उनकी सामाजिक छवि को भी खराब कर रहे हैं। छात्रों को तकनीकी रूप से सतर्क करते हुए ललित ने सलाह दी कि भविष्य में कभी भी कोई संदेहास्पद ‘एपीके’ (APK) फाइल न खोलें और न ही इसे किसी परिचित को भेजें। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर अपनी लोकेशन साझा करने से बचें, क्योंकि यह जानकारी साइबर अपराधियों के लिए सहायक सिद्ध होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी सूचना, वीडियो या फोटो को बिना जांचे आगे साझा न करें। उनकी असलियत परखने के लिए ‘मेटाडेटा विश्लेषण’ जैसे टूल्स का उपयोग करने की सलाह भी दी गई। व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि एआई के बढ़ते चलन ने इंसानी सोचने-समझने की शक्ति को सीमित कर दिया है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे पढ़ने और लिखने के कार्यों में एआई के बजाय अपनी मौलिकता और गूगल जैसे खोज इंजन का विवेकपूर्ण उपयोग करें। शोधार्थी चेतन ने थीसिस और रिसर्च के क्षेत्र में एआई के बढ़ते दखल को नवाचार के लिए नुकसानदेह बताया। इस अवसर पर डॉ. जीतेंद्र डबराल, डॉ. ओम शंकर गुप्त और डॉ. योगेंद्र पांडेय सहित विभाग के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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