मिर्जापुर में विद्युत संविदा कर्मियों ने अपनी छंटनी और कथित शोषण के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। विद्युत संविदा मजदूर संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने छंटनी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2020 में विद्युत विभाग ने जैम पोर्टल के माध्यम से 854 संविदा कर्मियों की भर्ती के लिए टेंडर जारी किया था। यह टेंडर बेसिल कंपनी को मिला था, जिसने वर्ष 2023 तक संविदा कर्मियों से कार्य कराया। अप्रैल 2023 में टेंडर प्रक्रिया के तहत यह कार्य टीडीएस कंपनी को सौंपा गया, जिसने जिले में काम शुरू किया। संगठन का आरोप है कि टीडीएस कंपनी को डिस्कॉम द्वारा 1174 कर्मियों को रखने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब अचानक डिस्कॉम द्वारा छंटनी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। संगठन ने इसे अनुचित बताते हुए सवाल उठाया कि जब कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई थी, तो अब छंटनी करने से पूर्वांचल डिस्कॉम को क्या लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बेरोजगारी कम करना है, न कि रोजगार छीनना। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2020 से 2026 तक जिले में नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित हुए हैं और पुराने उपकेंद्रों पर फीडरों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। संगठन के अनुसार, कार्यभार बढ़ने के बावजूद संविदा कर्मियों की छंटनी करना पूरी तरह अनुचित है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। संगठन ने प्रशासन को अवगत कराया कि छंटनी से कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने भुखमरी और बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छंटनी की प्रक्रिया तत्काल नहीं रोकी गई, तो सभी संविदा कर्मी सामूहिक रूप से त्यागपत्र देकर कार्य छोड़ देंगे। संगठन ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी औद्योगिक अशांति की पूरी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों और उच्च प्रशासन की होगी।
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