भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क घोषित किया। इस घोषणा के साथ अमेरिकी ट्रेड ऑफिस (USTR) ने इंडियन मैप शेयर किया। इस मैप में पूरा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन (चीन के कब्जे वाला इलाका) को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है। यह नक्शा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे पाकिस्तान और चीन के लिए एक बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। अमेरिका पहले के नक्शों में PoK को अलग से दिखाता था। अमूमन अंतरराष्ट्रीय मंचों और पश्चिमी देशों के सरकारी नक्शों में विवादित हिस्सों को अलग रंग या ‘डॉटेड लाइन्स’ से दिखाया जाता है। इस बार ट्रम्प प्रशासन ने जानबूझकर या अनजाने में एक ऐसा नक्शा जारी किया जो भारत की सीमाओं को पूरी तरह मान्यता देता है। भारत हमेशा से जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता आया है। अमेरिका ने यह इंडियन मैप शेयर किया है… PoK को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच PoK विवाद जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से जुड़ा सबसे पुराना विवाद है। यह 1947 से चला आ रहा है और दोनों देशों के बीच युद्ध, तनाव और कूटनीतिक लड़ाई का कारण बना हुआ है। विवाद की शुरुआत पाकिस्तान PM बोले थे- कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा अमेरिका ने यह मैप शेयर कर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 5 फरवरी को बयान जारी कर कहा था कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा। शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ मजबूती से खड़ा है और जम्मू-कश्मीर विवाद का हल कश्मीर के लोगों की इच्छा के मुताबिक होना चाहिए। शहबाज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों को लागू करने से ही हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘मैं पाकिस्तानी लोगों और पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से कश्मीर के अपने भाइयों के साथ एकजुटता दिखाने आया हूं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान की लाइफ लाइन बताया था। शहबाज बोले- कश्मीर का मुद्दा हमारी फॉरेन पॉलिसी की नींव है शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी का आधार है। शहबाज ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के बाद कश्मीर मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी ताकत के साथ उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब प्रॉक्सी के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। पाकिस्तान मिलिटेंट ग्रुप बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को भारत का समर्थन मिलने का दावा करता है, जबकि भारत ऐसे आरोपों को हमेशा खारिज करता रहा है। 1962 के जंग के बाद अक्साई चिन पर चीन का कब्जा अक्साई चिन विवाद भारत और चीन के बीच सबसे पुराने और सबसे संवेदनशील सीमा विवादों में से एक है। यह क्षेत्र लद्दाख के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित एक ऊंचा, बंजर और ठंडा रेगिस्तानी इलाका है, जो लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। अक्साई चिन तिब्बत को शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाला एकमात्र प्रमुख रास्ता प्रदान करता है। चीन ने यहां काराकोरम हाईवे (G219) बनाया है, जो उसकी सैन्य और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बेहद जरूरी है। भारत इसे लद्दाख का अभिन्न हिस्सा मानता है और इसपर चीन का अवैध कब्जा मानता है। इस क्षेत्र को जॉनसन लाइन (1865) के तहत भारत में दिखाया था, लेकिन बाद में मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड लाइन (1899) ने इसे चीन के करीब दिखाया। 1947 में भारत के आजाद होने के बाद, जम्मू-कश्मीर के विलय के साथ भारत ने अक्साई चिन को अपना हिस्सा माना। 1950 के दशक में चीन ने चुपके से तिब्बत-शिनजियांग को जोड़ने वाली सड़क बनानी शुरू की, जिसकी जानकारी भारत को 1957-58 में मिली। भारत ने इसका विरोध किया, लेकिन चीन ने इसे अपना क्षेत्र बताया। यह विवाद 1962 के भारत-चीन युद्ध का मुख्य कारण बना। युद्ध के बाद चीन ने लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखा और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के रूप में वर्तमान सीमा बनाई गई। 1962 के युद्ध के बाद अक्साई चिन पर चीन का कब्जा बना रहा।
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