महोबा में अर्जुन सहायक परियोजना के डूब क्षेत्र को लेकर गंज गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे गांव को डूब क्षेत्र में घोषित करने के बावजूद अब केवल 260 परिवारों को ही मुआवजा दिया जा रहा है। इससे आधे ग्रामीण अधर में लटके हुए हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग उनके साथ ‘सौतेला व्यवहार’ कर रहा है, जिससे महोबा की यह महत्वाकांक्षी परियोजना उनके लिए मुसीबत का सबब बन गई है। डूब क्षेत्र की पुरानी घोषणा और विवाद यह मामला वर्ष 2009 से जुड़ा है, जब विभाग ने गंज गांव में बोर्ड लगाकर किसी भी नए निर्माण पर रोक लगा दी थी और पूरे गांव को डूब क्षेत्र में घोषित किया था। अब जब मुआवजे और विस्थापन की बारी आई है, विभाग ने अपने रुख में बदलाव कर दिया है। अनुचित पैमाइश पर सवाल ग्रामीणों के अनुसार, पड़ोसी गांवों जैसे गुगौरा झिर और सहेवा को पूरी तरह डूब क्षेत्र में शामिल कर लाभ दिया गया, जबकि गंज गांव के केवल 260 परिवारों को ही पात्र माना गया। विभाग ने एक ही रास्ते के एक तरफ के मकानों को डूब क्षेत्र में लिया, जबकि दूसरी तरफ के मकानों को छोड़ दिया। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि अगर एक तरफ पानी होगा, तो दूसरी तरफ रहने वाले लोग आवागमन कैसे करेंगे। किसानों की चेतावनी ग्रामीण संतराम त्रिपाठी और जयप्रकाश द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2016-17 में हुई पैमाइश में पूरे गांव को शामिल किया गया था, लेकिन अब विभाग किसानों के साथ धोखा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुनः पैमाइश कर पूरे गांव को परियोजना का लाभ और मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। फिलहाल, जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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