मेरठ में मनरेगा लोकपाल के एक अहम आदेश की अनदेखी का मामला सामने आया है। शिकायत की जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने के बाद 1.72 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया गया था। हालांकि, 9 महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी यह राशि मनरेगा खाते में जमा नहीं कराई गई। शिकायत के बाद खुला मामला
यह मामला कसेरू बक्सर निवासी नीरज कुमार की शिकायत से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान खोडराय, ग्राम पंचायत सचिव और विकास खंड हस्तिनापुर के तत्कालीन अधिकारियों ने एक स्कूल में समतलीकरण के मिट्टी कार्य के दौरान मनरेगा के तहत 1,72,956 रुपये के सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया।
लोकपाल ने दिए थे सख्त निर्देश
जांच सही पाए जाने पर जिला लोकपाल मनरेगा ने 3 जनवरी, 2025 को आदेश दिया था कि दुरुपयोग की गई पूरी रकम एक माह के भीतर मनरेगा खाते में जमा कराई जाए। साथ ही जमा राशि की रसीद लोकपाल कार्यालय को देने और ग्राम पंचायत सचिव खोडराय तथा विकास खंड हस्तिनापुर के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी सिफारिश की गई थी। आदेश के बाद भी नहीं जमा हुई रकम
निर्धारित समय-सीमा बीतने के बावजूद न तो जुर्माने की राशि मनरेगा खाते में जमा कराई गई और न ही उसकी रसीद लोकपाल कार्यालय को सौंपी गई। एक साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। खास बात यह है कि इस आदेश पर रोक लगाने वाला कोई स्थगन आदेश भी लोकपाल कार्यालय को नहीं मिला है। अधिकारियों ने दी कार्रवाई की चेतावनी
संबंधित अधिकारी का कहना है कि जुर्माना राशि वसूलने के लिए सक्षम अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। अगर तय समय में वसूली नहीं होती है, तो आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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