राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी व विमर्श प्रमुख मुकुल कानिटकर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कारण भारत की आधुनिक शिक्षा गुरुकुल के प्रति जागरुक हो रही है। भारत में आने वाले 25-30 सालों में शिक्षण प्रणाली में हो रहा बदलाव साफ तौर पर दिखाई पड़ने लगेगा । उन्होंने बताया कि पूरे विश्व गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को अपनाने पर जोर है और 40 देशों में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की शुरुआत हो गयी है और नये-नये गुरुकुल खुल रहे हैं। हाल ही इंडोनेशिया में 13 गुरुकुल संचालित हुए है। इसके लिए 13 आचार्यों की डिमांड की गयी थी जिन्हें भेजा गया।
संघ के अखिल भारतीय अधिकारी कानीटकर यहां श्री गुरु वशिष्ठ सेवा न्यास के द्वारा संचालित श्रीगुरू वशिष्ठ विद्यालय में प्रवेशित बटुक ब्रह्मचारियों के उपनयन संस्कार में हिस्सा लेने आए थे। उन्होंने बताया कि विश्व में शैक्षिक रेटिंग निर्धारित करने वाली संस्था पीसा की नंबर वन रैंकिंग में फिनलैंड सर्वोच्च स्थान पर है जबकि दूसरे व तीसरे स्थान पर इंडोनेशिया व आस्ट्रेलिया लिया है। इस रेटिंग में भारत स्थान अभी काफी नीचे है लेकिन अंतिम पायदान पर अमेरिका है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड में आठ घंटे के विद्यालय समय में 90 मिनट क्लास रूम के लिए निर्धारित है जबकि शेष समय अलग-अलग एक्टिविटी के लिए तय है। यहां की शिक्षा प्रणाली भारतीय प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति पर आधारित है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल शिक्षा का पाठ्यक्रम देश-विदेश सभी जगह समान है। भाषाई अंतर जरूर रहता है।
संघ के अखिल भारतीय प्रचारक मुकुल कानीटकर ने बताया कि गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के पांच आयाम है। इनमें पहला वेद जिसके अंतर्गत विभिन्न शास्त्रों का अध्ययन शामिल हैं। दूसरा विज्ञान इसमें खगोल विज्ञान से लेकर आधुनिक विज्ञान की शिक्षा है। तीसरा कला जिसमें विभिन्न कलाओं की दीक्षा के साथ कम्प्यूटर विषय भी सम्मिलित हैं। इसी तरह चौथा कृषि व पांचवां योग है। उन्होंने बताया कि भारत में अनादि काल से गुरुकुल की शिक्षा का संचालन होता रहा है। आक्रांताओं के द्वारा बड़े बड़े विश्वविद्यालयों व पुस्तकालयों का ध्वंस करने के बाद भी ब्रिटिश काल में भी सात लाख गुरुकुल संचालित थे। इसी के चलते मैकाले ने इस व्यवस्था की जड़ समाप्त करने की साज़िश की। फिलहाल भारत वर्ष में दस हजार विद्यालय संचालित है।
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