आजमगढ़ जिले के थाना अहरौला क्षेत्र मे सुबह पुलिस और गो-तस्करों के बीच मुठभेड़ हो गई। उस दौरान एक हिस्ट्रीशीटर गो-तस्कर पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दाहिने पैर में गोली लगने से घायल हो गया। आरोपी के कब्जे से अवैध तमंचा, 4 कारतूस तथा बिना नंबर की मोटरसाइकिल बरामद किये गये हैं। घायल गो-तस्कर पर 8 मुकदमे दर्ज रहे, जिसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। जबकि उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। जिसकी तलाश की जा रही है। वहीं तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह योगी की पुलिस कार्रवाई में वह हाथ जोड़कर लंगड़ाते चल रहा है। जिले में लगातार चल रहा है अभियान
प्रदेश में अपराध व अपराधियों पर योगी सरकार की पुलिस कहर बनकर गरज रही है। उसी क्रम में आजमगढ़ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अहरौला थाने की पुलिस करीब 3 बजे क्षेत्र में गश्त व अपराध नियंत्रण और संदिग्ध वाहन की चेकिंग में जुटी हुई थी। उस दौरान पुलिस को सूचना मिली कि सहराजा मोड़ से निजामपुर की ओर दो गो-तस्कर गोवध की नीयत से जा रहे हैं। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने ग्राम तरकूलहा के पास घेराबंदी कर मोटरसाइकिल सवार 2 संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया। किंतु खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की गई। पुलिस द्वारा आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बाद भी बदमाशों की ओर से फायरिंग जारी रही। आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के दाहिने पैर में गोली लग गई। जिससे वह घायल हो गया। जबकि दूसरा बदमाश मौके से फरार हो गया। घायल अभियुक्त की पहचान जाकिर उर्फ शैफ निवासी कुरैशी टोला माहुल, थाना अहरौला के रूप में हुई है। वह जिले के अहरौला थाने का घोषित हिस्ट्रीशीटर जिसका नंबर HS-30A है। पूछताछ में घायल अभियुक्त ने फरार साथी का नाम दिलशाद उर्फ लालू निवासी कस्बा माहुल बताया है। घायल अभियुक्त को प्राथमिक उपचार के बाद सीएचसी फूलपुर से जिला अस्पताल रेफर किया गया है। वहीं फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें गठित कर लगातार दबिश दी जा रही है। घटनास्थल को सुरक्षित कर फील्ड यूनिट द्वारा साक्ष्य संकलन की कार्रवाई भी की गई है। मौके से पुलिस ने एक अवैध तमंचा, दो खोखा व दो जिंदा कारतूस तथा बिना नंबर प्लेट की सुपर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पूछताछ में घायल अभियुक्त ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ सुनियोजित ढंग से गोवध व गौ-तस्करी करता था। वे देर रात सुनसान इलाकों में घूम रहे गोवंश को पकड़कर निर्जन स्थानों पर अवैध रूप से वध करते तथा मांस को ऊंचे दामों पर बेचते थे। साक्ष्य मिटाने के लिए अवशेष नदी-नालों में फेंक दिए जाते थे या जमीन में गाड़ दिए जाते थे। अभियुक्तगण द्वारा कुछ गोवंशों को बिहार सहित अन्य प्रांतों में अवैध रूप से बेचने की बात भी सामने आई है। यह अभियुक्तगण पूर्व में भी कई बार गोवध व गौ-तस्करी के मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। घायल अभियुक्त जाकिर उर्फ शैफ के विरुद्ध हत्या, गैंगस्टर एक्ट, गोवध निवारण अधिनियम समेत कुल 8 गंभीर मुकदमें दर्ज हैं।
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