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मुस्लिम एवं ब्राह्मण मतदाताओं पर बसपा का फोकस:जिला संगठन में नजर आएंगे दोनों वर्ग के चेहरे

लंबे समय से सत्ता से दूर बैठी और चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की कोशिश में लगी बसपा इस बार हर हाल में जीत हासिल करना चाहती है। पार्टी ने इसके लिए अपनी रणनीति को आक्रामक किया है। अपने दलित कोर वोटरों के सहारे पार्टी मुस्लिम एवं सवर्ण मतदाताओं को भी साधने की जुगत लगा रही है। इसके लिए सवर्णों में ब्राह्मण वर्ग पर और इसके साथ मुस्लिम नेताओं को तवज्जो देने की तैयारी है। सभी जिलों के जिला संगठन में अनिवार्य रूप से एक ब्राह्मण और एक मुस्लिम चेहरे को स्थान देना है। सभी मुख्य मंडल प्रभारियों और जिलाध्यक्षों को इस बात की जानकारी दी जा चुकी है। गोरखपुर व आसपास के जिलों में जिलाध्यक्ष अपनी जिला कमेटी की समीक्षा करने मे जुट गए हैं। जहां ब्राह्मण व मुस्लिम पदाधिकारी नजर नहीं आएंगे, वहां सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा। इन वर्गों से पदाधिकारियों के चयन की जिम्मेदारी जिलाध्यक्षों को दी गई है। बसपा सुप्रीमो की ओर से इसे अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया है। 2007 में नजर आयी थी सोशल इंजीनियरिंग
2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को इसी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए सफलता मिली थी और मायावती ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी। इस बार लाखों की भीड़ के साथ ताकत दिखाने के बाद बसपा सुप्रीमो एक बार फिर इसी फार्मूले पर चल रही हैं। पिछली बार मुस्लिम भी उनके साथ थे इसलिए इस बार भी दलित के साथ ब्राह्मण व मुस्लिम का गठजोड़ कर नाव पार लगाने की जुगत की जा रही है। ब्राह्मणों के मुद्दे पर मुखर हैं बसपा सुप्रीमो प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में बदलते राजनीतिक परिदृश्य में ब्राह्मणों की भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर हुई है। इसके बाद सपा व बसपा उन्हें अपने पक्ष में करने में जुट गई है। वरिष्ठ पत्रकार पीएन राय कहते हैं कि जिस तरह से मायावती ब्राह्मणों को लेकर बयान दे रही हैं, उससे बसपा के प्रति ब्राह्मणों का लगाव बढ़ सकता है। सपा प्रमुख भी इस कोशिश में लगे हैं लेकिन सपा व बसपा में किसी का चयन करना होगा तो ब्राह्मण बसपा का चयन करते नजर आएंगे। हालांकि अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि सरकार भी ब्राह्मणों को खुश करने के उपाय ढूंढने में लगी है। मनोज वाजपेयी की फिल्म पर एफआईआर का आदेश इन्हीं उपायों में से एक है। पार्टी में वापस लाए जा रहे मुस्लिम चेहरे
स्थानीय स्तर पर मुस्लिम चेहरों को पार्टी में वापस लाने की कवायद शुरू हो चुकी है। लोकसभा का चुनाव लड़ चुके जावेदन सिमनानी ने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था लेकिन हाल ही में उन्हें फिर बसपा में वापस लाया गया है। सिमनानी की तरह की अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी यह काम चल रहा है। जिलाध्यक्ष हरि प्रकाश निषाद का कहना है कि बसपा सर्वसमाज का पार्टी है। इसलिए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।


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