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रेलवे कर्मचारी की मौत पर डीआरएम दफ्तर में भारी हंगामा:शव रखकर परिजनों ने किया प्रदर्शन, जबरन ड्यूटी और इंचार्ज की प्रताड़ना से मौत का आरोप

पूर्वोत्तर रेलवे में ड्यूटी के दौरान अत्यधिक कार्यभार और मानसिक प्रताड़ना का एक खौफनाक अंजाम सामने आया है। संजय नगर निवासी 45 वर्षीय ताराचंद, जो फतेहगढ़ में लोहार के पद पर तैनात थे, की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है कि उनके इंचार्ज आत्माराम उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। न तो उन्हें रेस्ट दिया जा रहा था और न ही उनकी बात सुनी जा रही थी। उल्टा, उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी, जिससे वे गहरे डिप्रेशन में चले गए थे। डीआरएम दफ्तर के बाहर शव रखकर आक्रोश
ताराचंद की तबीयत 25 जनवरी को ड्यूटी के दौरान ही बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें कानपुर के मधुराज अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गुस्साए परिजन शव को कानपुर से सीधे एंबुलेंस से बरेली लाए और डीआरएम दफ्तर के बाहर रखकर हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने साफ कर दिया कि जब तक दोषी अधिकारी आत्माराम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शव वहां से नहीं हटाया जाएगा। पत्नी बोली- ‘आत्माराम मुझे नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं’
मृतक की पत्नी सावित्री देवी ने रोते हुए बताया कि ताराचंद अक्सर घर पर अधिकारी की ज्यादती का जिक्र करते थे। उन्होंने बताया कि उन पर काम का बोझ इतना बढ़ा दिया गया था कि उन्हें सांस लेने तक की फुर्सत नहीं थी। लगातार ड्यूटी और अधिकारी की धमकियों के कारण उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ। परिजनों का कहना है कि इस मौत का सीधा जिम्मेदार इंचार्ज आत्माराम है, जिसकी वजह से तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला
हंगामे की सूचना मिलते ही सीनियर डीएसटी प्रवेश कुमार और वेलफेयर इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों की शिकायतों को सुना और आरोपी इंचार्ज के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ही परिजन शव को वहां से हटाने के लिए तैयार हुए। बेसहारा हुआ परिवार, तीन बच्चों का भविष्य अधर में
ताराचंद अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनके पीछे 16 साल का बेटा, 14 साल की बेटी प्रियांशी और 10 साल की बेटी अनमोल है। पिता की मौत के बाद अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने मांग की है कि दोषी को सजा मिलने के साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाए।


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