लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पेंशन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। उनकी मौत के बाद बेटा-पोते मिलकर करीब 7 साल तक फर्जी अंगूठे से पेंशन का लाभ लेते रहे। भतीजे की शिकायत पर मामले का खुलासा हुआ। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया। बख्शी का तालाब क्षेत्र के तारनापुर पहाड़पुर के रहने वाले आयुष कुमार ने बताया- उनके ताऊ पुत्तीलाल साल 2002 में रिटायर हुए थे। उनकी मृत्यु 23 दिसंबर 2017 को हो चुकी थी। आरोप है कि पुतीलाल के बेटे रामबहादुर और उनके तीन बेटों अभिषेक, विवेक और विशाल ने षड्यंत्र रचकर आर्थिक लाभ के लिए करीब सात सालों तक फर्जी तरीके से पेंशन का भुगतान कराया। आरोपियों ने पुत्तीलाल को साल 2023 तक जीवित दर्शाते हुए पेंशन उठाते रहे। दूसरे ताऊ को खड़ा करके की धोखाधड़ी आरोपियों ने अपने दूसरे ताऊ चुन्नीलाल, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं, को पुतीलाल बनाकर पेश किया और कूटरचित तरीके से उनके फर्जी अंगूठा निशान लगवाकर पेंशन का भुगतान कराया गया। जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी चुन्नीलाल को हुई तो उन्होंने संबंधित विभाग को शपथ पत्र देकर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद पेंशन विभाग ने जांच टीम गठित की। जांच के दौरान गांव के लोगों के बयान दर्ज किए गए। तब पता चला पुतीलाल की मृत्यु 6–7 साल पहले ही हो चुकी थी। जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पुतीलाल की मृत्यु की तीन अलग-अलग तिथियां दिखाई गई हैं। सांठगांठ से एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया रामबहादुर और उनके बेटों ने आपसी सांठगांठ से एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार कराया। जिसमें पुतीलाल की मृत्यु की 3 जनवरी 2023 दर्शाई गई। जब इस मृत्यु प्रमाण पत्र की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई तो पता चला कि यह प्रमाण पत्र सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध ही नहीं है। अंग्रेजी हस्ताक्षर भी गलत दस्तावेज़ पर किया गया अंग्रेजी हस्ताक्षर भी गलत बताया जा रहा है। इंस्पेक्टर कैसरबाग अंजनी मिश्रा ने बताया भतीजे ने शिकायत की थी। जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है।
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