बरेली मंडल के आयुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने शुक्रवार को पीलीभीत तहसील का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सरकारी जमीन पर बने किसी भी गरीब के मकान को ढहाने से पहले उसके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाए। आयुक्त ने कहा कि पहले रहने का इंतजाम हो, फिर आगे की कार्रवाई की जाए। निरीक्षण के दौरान, आयुक्त चौधरी ने जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के साथ तहसील कार्यालय में फाइलों की गहन जांच की। उन्होंने रिकॉर्ड रूम, कंप्यूटर कक्ष और पट्टा आवंटन से संबंधित दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन किया। अव्यवस्था पाए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। आयुक्त ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित मामलों और तहसील दिवस की शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति को बदला जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान, कई फरियादियों ने अपनी समस्याएं बताईं। ग्राम मटैना निवासी विमलेश ने शिकायत की कि उनकी जमीन की पैमाइश का आवेदन बिना किसी कारण के निरस्त कर दिया गया है। रुक्मिणी देवी ने बताया कि दबंगों ने उनके खेत का रास्ता रोक दिया है, जिससे उन्हें फसल घर लाने में परेशानी हो रही है। आयुक्त ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तुरंत पैमाइश कराने और अवरुद्ध रास्ते को खुलवाने के आदेश दिए। तहसील परिसर में अधिवक्ताओं और जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष मनोज सिंह कुशवाहा ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। अधिवक्ताओं ने निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस) के बाबू डी.के. पर काम में बाधा डालने और परेशान करने का आरोप लगाया, जिसके बाद उनके तत्काल तबादले की मांग की गई। कमिश्नर ने तहसील न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों पर जांच का आश्वासन दिया। इस निरीक्षण के दौरान, एसडीएम नागेंद्र पांडे, तहसीलदार हबीब उर रहमान, नायब तहसीलदार बीरबल और अवधेश कुमार सहित भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।
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