मथुरा-वृंदावन को वर्ष 2030 तक हेरीटेज सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शहर में प्रदूषण कम करने, यातायात व्यवस्था सुधारने और जाम की समस्या से निजात दिलाने की योजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को राहगीरी फाउंडेशन ने एक हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें नीति विकास और कम उत्सर्जन क्षेत्र (लो एमिशन जोन) विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यशाला में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, नगर आयुक्त जग प्रवेश और राहगीरी फाउंडेशन की डायरेक्टर निधि सहित कई अधिकारी व संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। फाउंडेशन ने मथुरा-वृंदावन में बढ़ते प्रदूषण और यातायात जाम की समस्या के समाधान के लिए एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। प्रस्तावित योजना में शहर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम होगा। ई-रिक्शा और ऑटो की संख्या को नियंत्रित करने, निर्धारित ट्रैफिक रूट लागू करने तथा यातायात संचालन को व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से प्रदूषण स्तर में कमी आएगी और यातायात सुचारू होगा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर हैं। इनके संरक्षण और विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहा कि नई यातायात योजना से जाम की समस्या कम होगी और श्रद्धालुओं व स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि विभिन्न विभागों के समन्वय और जनसहयोग से मथुरा-वृंदावन को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और प्रदूषण मुक्त हेरीटेज सिटी के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
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