जालौन की उरई स्थित सिविल अदालत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से जुड़े एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए विभाग के पूर्व अधिशासी अभियंता नरेन्द्र प्रकाश के खिलाफ 92,780 हजार की रिकवरी का आदेश दिया है। यह फैसला सिविल जज (जू० डि०) प्रत्यूष प्रकाश ने वाद संख्या 212/2014 में एकपक्षीय रूप से सुनाया है। अदालत में दायर वाद के अनुसार, राज्य सरकार एवं लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-3, उरई द्वारा पूर्व अधिशासी अभियंता नरेन्द्र प्रकाश के विरुद्ध सरकारी धन में अनियमितता के आरोप में वसूली का दावा किया गया था। वादीगण की ओर से बताया गया कि नरेन्द्र प्रकाश ने 1 अप्रैल 2006 से 31 जुलाई 2010 तक लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड-3, उरई में अधिशासी अभियंता के पद पर रहते हुए हमीरपुर–कालपी मार्ग के किलोमीटर 31 से 51.900 तक सीआरएफ योजना के अंतर्गत चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य संपादित कराया था। कार्य की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने पर शासन स्तर से टीएसटी पार्टी द्वारा जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि कार्य के दौरान 92,780 रुपए की अनियमितताएं हुईं। संयुक्त सचिव की रिपोर्ट दिनांक 19 मई 2009 के आधार पर विभाग ने इसे सरकारी धन की क्षति माना और वसूली की कार्रवाई के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान वादीगण की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। साथ ही लोक निर्माण विभाग के अपर अभियंता राधेश्याम सिंह को पीडब्ल्यू-1 के रूप में पेश किया गया, जिन्होंने शपथपत्र के माध्यम से वाद पत्र के सभी कथनों का समर्थन किया। प्रतिवादी नरेन्द्र प्रकाश की ओर से कोई प्रभावी पैरवी न होने के कारण मामला एकपक्षीय रूप से सुना गया। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट माना कि प्रतिवादी द्वारा अपने कार्यकाल में वित्तीय अनियमितता की गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि नरेन्द्र प्रकाश निर्णय की तिथि से 60 दिन के भीतर 92,780 रुपए की राशि राज्य सरकार को अदा करें। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो प्रतिवादी की पेंशन की भी अदायगी नहीं की जाएगी।
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