चित्रकूट जनपद में फाइलेरिया (हाथी पांव) की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह अभियान 10 फरवरी से 28 फरवरी तक चलाया जाएगा। इसके तहत 5 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को घर-घर जाकर दवा खिलाई जाएगी। इस अभियान के तहत जनपद के कुल 7 लाख 79 हजार 956 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने 680 टीमें और 129 सुपरवाइजर नियुक्त किए हैं। ये टीमें घर-घर जाकर दवा वितरण का कार्य करेंगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेश द्विवेदी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है, जिसका बचाव ही एकमात्र उपचार है। यह बीमारी मच्छर के काटने से फैलती है। इससे बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए और अपने आसपास जलभराव नहीं होने देना चाहिए, ताकि मच्छर न पनप सकें। अभियान में डीईसी, एलबेंडाजोल और आईवरमेक्टिन की गोलियां खिलाई जाएंगी। 1 से 2 वर्ष के बच्चों को एलबेंडाजोल की आधी गोली, 2 से 5 वर्ष के बच्चों को डीईसी की एक गोली और 5 से 15 वर्ष के बच्चों को डीईसी की दो गोलियां दी जाएंगी। 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को ये तीनों दवाएं (डीईसी, एलबेंडाजोल, आईवरमेक्टिन) खिलाई जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें यह दवा अपने सामने ही खिलाएंगी। दवा को खाना खाने के बाद ही लेना है। एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों को यह दवा नहीं खिलाई जाएगी। इन दवाओं के कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हैं। यदि किसी व्यक्ति को दवा खाने के बाद कोई समस्या होती है, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराएगी। लोगों में दवा के साइड इफेक्ट को लेकर बनी आशंका को दूर करने के लिए जनपद के बड़े अधिकारी भी इस अभियान की शुरुआत में स्वयं दवा का सेवन करेंगे।
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