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मंगल भवन का AMU निरस्त कर जांच हो:कानपुर सांसद बोले- जमीन नगर निगम की, अधिकार किसी निजी कम्पनी को क्यों, कैसे मिलेगा गरीबों और वंचितो को लाभ

कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने मंगल भवन को लेकर नगर निगम और निजी कंपनी के बीच हुए अनुबंध (एमओयू) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसकी जांच कराने और जरूरत पड़ने पर अनुबंध को रद्द करने की मांग की है।
कानपुर के बृजेंद्र स्वरूप पार्क में गरीब और वंचित वर्ग के लोगों के लिए मंगल भवन बनाया गया है। यह भवन नगर निगम की जमीन एक निजी कंपनी द्वारा बनवाया गया, ताकि गरीब परिवारों को कम किराये पर विवाह स्थल मिल सके। लेकिन अब इस भवन के संचालन और अधिकारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
सांसद रमेश अवस्थी ने दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में कहा कि काम गरीबों और वंचितों के हित में होना चाहिए। लेकिन जिस तरह से मंगल भवन के अधिकार सीधे तौर पर जेसीआई नाम की निजी संस्था को दे दिए गए हैं, वह सही नहीं लगता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसके लिए कोई विज्ञापन या नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।
उन्होंने कहा कि नगर निगम जमीन भी दे रहा है और पैसा भी लगाया गया है, लेकिन निगरानी समिति में केवल निजी कंपनी के लोग शामिल हैं। इससे पूरी व्यवस्था एक ही कंपनी के हाथ में चली गई। कंपनी के अपने वेंडर होंगे और सारा फायदा भी उसी को मिलेगा।
सांसद ने कहा कि भले ही मंगल भवन की बुकिंग राशि 31 हजार रुपये बताई जा रही हो, लेकिन वेंडर और अन्य खर्च जोड़ने पर कुल खर्च लगभग दो लाख रुपये तक पहुंच जायेगा। इससे गरीब लोगों को असल में कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी कंपनी ने सीएसआर के तहत पैसा दिया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह नगर निगम की संपत्ति पर अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा कर ले। भवन में जगह-जगह कंपनी के नाम के बड़े ही बोर्ड लगे हुए हैं, जो गलत संदेश देता है।
सांसद रमेश अवस्थी ने साफ कहा कि उन्हें किसी संस्था से व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन यह व्यवस्था अमीरों के फायदे जैसी लगती है। उन्होंने मांग की कि इस अनुबंध को समाप्त किया जाए और अगर कोई अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी जिम्मेदारी है कि जनप्रतिनिधि के नाते जनता के हित में जो हो वो करूं। जीरो टॉलरेंस की नीति वाली सरकार में नगर निगम की जमीन का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों के लिए होना चाहिए।


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