रायबरेली में इंकलाबी नौजवान सभा ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर में पदाधिकारियों ने नारेबाजी की और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। यह रेगुलेशन विश्वविद्यालय परिसरों में लैंगिक और जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। सभा के पदाधिकारियों ने इसे सशक्त तरीके से लागू किए जाने की मांग की। सभा के जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा इस रेगुलेशन पर अस्थायी रोक लगाना केंद्र सरकार की दोहरी मंशा को उजागर करता है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा न्यायालय में कोई ठोस प्रतिवाद न किए जाने को चिंताजनक बताया। शर्मा ने आगे कहा कि यह रेगुलेशन रोहित वेमुला की मां और पायल तडवी के परिजनों की याचिकाओं के क्रम में पारित आदेशों के तहत तैयार किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय द्वारा इसमें सुधार के निर्देश देने के बजाय रोक लगाना, विश्वविद्यालयों में बढ़ते लैंगिक और जातिगत भेदभाव के मामलों की अनदेखी को दर्शाता है। इंकलाबी नौजवान सभा के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि संभावित दुरुपयोग के आधार पर समानता की दिशा में उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम को रोकना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को बिना देरी के पूरी तरह लागू किया जाए ताकि शिक्षा संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित हो सके। प्रदर्शन के दौरान सभा के कई अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। उन्होंने केंद्र सरकार और न्यायिक फैसले के खिलाफ नारेबाजी की।
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