अलीगढ़ में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को डिजिटल अरेस्ट कर 20.82 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और करीब तीन हफ्तों तक खौफ में रखा। अकराबाद निवासी पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। 7 जनवरी से शुरू हुआ डराने का खेल पूरे घटनाक्रम की शुरुआत फेक कॉल से हुई। 7 जनवरी को रिटायर्ड बैंक मैनेजर के पास एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई (CBI) अफसर बताया। ठग ने कहा कि आपका बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। आपके खिलाफ वारंट जारी हो चुका है और पुलिस कभी भी घर पहुंच सकती है। पत्नी के व्हाट्सएप नंबर से रखी नजर इसके बाद ठग ने पीड़ित का व्हाट्सएप नंबर मांगा। उन्होंने कहा कि वह सोशल मीडिया प्लेटफार्म से दूर हैं और व्हाट्सएप नंबर नहीं है। इसके बाद ठगों ने पीड़ित की पत्नी का नंबर ले लिया। उस नंबर वीडियो कॉल के जरिए उन पर ‘डिजिटल’ नजर रखी जाने लगी। 4 किस्तों में ट्रांसफर कराए 20.82 लाख ठगों ने मैनेजर को इस कदर डरा दिया कि उन्होंने डर के मारे परिवार को भी कुछ नहीं बताया। ठगों के निर्देश पर पीड़ित ने 13 जनवरी, 20 जनवरी, 21 जनवरी और 28 जनवरी को कुल 20.82 लाख रुपए चार बार में ठगों के खातों में भेज दिए गए। जब बैंक खाता खाली होने लगा, तब मैनेजर को ठगी का अहसास हुआ। क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट करने के नाम पर 4.50 लाख साफ टप्पल क्षेत्र के नूरपुर गांव में भी ठगी का एक और मामला सामने आया है। यहां एक ग्रामीण को क्रेडिट कार्ड चालू करने का झांसा देकर एक ‘ऐप’ डाउनलोड कराया गया। ऐप इंस्टॉल होते ही ठगों ने खाते से 4.50 लाख रुपए उड़ा दिए। संदिग्ध नंबरों को किया जा रहा ट्रेस साइबर थाना प्रभारी महेश त्यागी का कहना है कि दोनों मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी डिटेल निकाली जा रही है। संदिग्ध नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है।
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