जिले आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में लगभग 12 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब विश्वविद्यालय का वित्त नियंत्रक कार्यालय पहले से ही जांच के दायरे में है। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ क्रॉप फिजियोलॉजी में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर राइस के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से उपकरणों की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई। इस प्रकरण में पूर्व परियोजना निरीक्षक (पीआई) डॉ. ए.के. सिंह की भूमिका पर सवाल उठे हैं, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। डॉ. सिंह को सत्र लाभ के कारण जून माह तक चार महीने का सेवा विस्तार भी दिया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि उपकरणों की खरीद के लिए दो बार टेंडर निरस्त किए गए। टेंडर निरस्त करने का कारण बिड करने वाली फर्मों के जीएसटीएन और पैन से संबंधित अभिलेखों का न होना बताया गया था, जबकि ये जेम पोर्टल पर पंजीकरण के लिए अनिवार्य होते हैं। लेखा परीक्षक को टेंडर पत्रावली में किसी भी फर्म की बिड से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। तीसरी बार कुलपति और वित्त नियंत्रक द्वारा 35 लाख रुपये की खरीद को अनुमोदन दिया गया। बिड प्रक्रिया में मेसर्स मोटर साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट प्राइवेट लिमिटेड, हरियाणा ने 22 लाख रुपये में उपकरण आपूर्ति की सहमति दी थी, लेकिन इस बिड को निरस्त कर दिया गया। इसके स्थान पर शिप्रा साइंटिफिक ट्रेडर्स से 34 लाख 19 हजार रुपये में उपकरण खरीदे गए, जो न्यूनतम दर से 12 लाख 19 हजार रुपये अधिक थे। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, यह ऑडिट आपत्ति वित्तीय वर्ष 2024-25 से संबंधित है। डॉ. ए.के. सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद डॉ. रामकलप यादव को प्रभारी पीआई नियुक्त किया गया है। डॉ. यादव ने बताया कि यह प्रकरण उनके कार्यकाल से पूर्व का है और इस संबंध में स्पष्टीकरण सीएजी को भेज दिया गया है। ऑडिट में यह भी उल्लेख है कि कई अनुस्मारक पत्रों के बावजूद संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे यह वित्तीय अनियमितता उजागर हुई।
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