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लखनऊ में बिरजू महाराज जयंती समारोह:कथक संस्थान ने कला और संस्कृति का उत्सव मनाया

लखनऊ में बिरजू महाराज कथक संस्थान की ओर से आयोजित ‘बिरजू महाराज जयंती समारोह’ कला और संस्कृति का एक यादगार उत्सव बन गया। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अंतर्गत इस संस्थान ने दो दिवसीय कार्यक्रम भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के कला मंडपम प्रेक्षागृह में आयोजित किया। इसका उद्देश्य कथक सम्राट बिरजू महाराज की स्मृति का सम्मान करना और नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय कला से जोड़ना था। संस्थान की परंपरा के अनुसार, बिरजू महाराज की जयंती पर प्रतिवर्ष विशेष आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में, समारोह के पहले दिन जयशंकर सभागार में एक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। दूसरे दिन एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसकी मुख्य अतिथि कथक नृत्यांगना और गुरु डॉ. पूर्णिमा पांडेय थीं। राग यमन पर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया सांस्कृतिक संध्या का आरंभ संस्थान के विद्यार्थियों की गायन प्रस्तुति से हुआ। राग यमन और तीनताल में निबद्ध चतुरंग ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। यह प्रस्तुति गायन प्रशिक्षिका मीना वर्मा के निर्देशन में दी गई। संगत कलाकारों में तबले पर आनंद दीक्षित और नीतीश भारती, बांसुरी पर स्वयं मिश्रा तथा सिंथेसाइजर पर शिवम पांडेय शामिल थे।जिसपर कलाकारों ने मिलकर यह सशक्त प्रस्तुति दी। इसके बाद असम की कलाकार मरमी मेधी और मेघरंजनी ने कथक युगल नृत्य प्रस्तुत किया। गणेश वंदना से शुरू हुई इस प्रस्तुति में लखनऊ घराने की शैली में विलंबित, मध्य और द्रुत लय में शुद्ध कथक की सुंदर झलक देखने को मिली। अंत में अभिनय के माध्यम से माधवदेव का बोरगीत और सूरदास का भजन प्रस्तुत किया गया। संगत कलाकारों में तबले पर राजीव शुक्ला, हारमोनियम पर जॉय प्रकाश मेधी, सारंगी पर जीशान अब्बास, बांसुरी पर दिगंत सैकिया और मंजीरा पर देबाशीष तालुकदार उपस्थित थे। संकल्पना पर आधारित ‘अतः किम’ नृत्य प्रस्तुति कार्यक्रम की तीसरी प्रस्तुति अहमदाबाद के कदम्ब सेंटर फॉर डांस एंड म्यूजिक की थी। गुरु कुमुदिनी लखिया की संकल्पना पर आधारित ‘अतः किम’ नृत्य प्रस्तुति ने जीवन की यात्रा को कथक के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। मिताली द्रुवा, मानसी मोदी, परिता पटेल, जग्नजा पांड्या, दिविजा पारिख और धरा वणेरा ने समूह नृत्य प्रस्तुत किया, जिसका प्रशिक्षण और नेतृत्व रूपांशी कश्यप ने किया।


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