अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मेरठ चलचित्र सोसायटी ने फिल्म के शीर्षक को आपत्तिजनक बताते हुए निर्माता कंपनी फ्राइडे फिल्मवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को कानूनी नोटिस भेजा है। यह फिल्म जल्द ही नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होने वाली है। सोसायटी का कहना है कि फिल्म का शीर्षक ब्राह्मण समुदाय को भ्रष्ट और अनैतिक दिखाने का प्रयास करता है, जो सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है। संस्था के अनुसार किसी धार्मिक या जातीय पहचान को अपराध जैसे शब्द से जोड़ना न सिर्फ गलत है, बल्कि इससे समाज में आपसी शत्रुता भी बढ़ सकती है। मेरठ चलचित्र सोसायटी ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि इस तरह का शीर्षक सामूहिक मानहानि की श्रेणी में आता है और इससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है। संस्था का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म होने के कारण नेटफ्लिक्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि उसकी पहुंच देश-विदेश के करोड़ों दर्शकों तक है। कानूनी नोटिस में सात प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई गई है। इसमें फिल्म के शीर्षक में तत्काल बदलाव करने, ‘पंडित’ शब्द हटाने और ब्राह्मण समुदाय से सार्वजनिक रूप से लिखित माफी मांगने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में किसी भी समुदाय को नकारात्मक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत न करने की चेतावनी भी दी गई है। सोसायटी ने साफ किया है कि यदि फिल्म को इसी शीर्षक और कंटेंट के साथ रिलीज़ किया गया, तो वह फिल्म की रिलीज़ रोकने सहित सभी वैधानिक और लोकतांत्रिक विकल्प अपनाएंगे। संस्था के महासचिव अंबरीश पाठक ने कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। उनका आरोप है कि फिल्म इंडस्ट्री में बार-बार हिंदू समाज को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाया जाता रहा है। उन्होंने पूर्व में फिल्मकार अनुराग कश्यप से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। मेरठ चलचित्र सोसायटी का कहना है कि वह रचनात्मक स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं है, लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। संस्था वर्षों से जिम्मेदार और सकारात्मक सिनेमा के समर्थन में काम करती आ रही है। यह कानूनी नोटिस मेरठ के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट वी.के. शर्मा द्वारा विधिसम्मत रूप से तैयार कर भेजा गया है।
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