लखनऊ विकास प्राधिकरण में ठेका और लिपिक पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर मौसी और बेटे ने भतीजे से 90 लाख रुपए ठग लिए। पीड़ित युवक ने रिटायर महिला कर्मचारी और उनके बेटे के खिलाफ हजरतगंज थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। यह केस कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ है।
बेटे के कारोबार में निवेश के नाम पर लिए रुपए अमीनाबाद के बारूदखाना इलाके का रहने वाले पीड़ित राहिल ने बताया कि मौसी ने वर्ष 2023 में अपने बेटे अब्दुल्ला के कारोबार में निवेश कराने के लिए उसे उकसाया। अब्दुल्ला की लालबाग नाजा मार्केट में ‘अरबाज ग्लोबल पॉलीमर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से फर्म है। भरोसे में आकर राहिल ने अक्तूबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच 70 लाख रुपए नकद और 20 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर कर दिए। न लाभ मिला, न र पए लौटे पीड़ित का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद आज तक उसे मुनाफे में कोई हिस्सा नहीं दिया गया। जब पैसे वापस मांगे गए तो घाटे का हवाला देकर टाल-मटोल की जाती रही। इसको लेकर कई बार विवाद भी हुआ। अगस्त 2024 में सुमायरा ने समझौते के नाम पर राहिल को अपने घर बुलाया और एलडीए से ठेकेदारी का पंजीयन कराने पर बड़ा ठेका दिलाने का आश्वासन दिया। महीनों बीतने के बाद भी ठेका नहीं मिला। इसके बाद मौसी ने एलडीए में लिपिक पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और दस्तावेज ले लिए। फर्जी नियुक्तिपत्र देकर भेजा एलडीए राहिल का कहना है कि सुमायरा ने अपने घर बुलाकर उसे लिपिक पद का नियुक्तिपत्र सौंपा। जब वह पत्र लेकर एलडीए कार्यालय पहुंचा, तो जांच में पता चला कि नियुक्तिपत्र और उस पर किए गए हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी हैं। जब उसने इस बारे में सुमायरा और उनके बेटों से विरोध जताया तो उसे धमकियां दी गईं। इसके बाद उसने कोर्ट की शरण ली। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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