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हाथियों की जान बचाएगा पूर्वोत्तर रेलवे का AI सिस्टम!:99 किमी ट्रैक पर बिछेगा तकनीक का जाल, ​सेंसर से पकड़ में आएगी हाथियों की आहट

पूर्वोत्तर रेलवे अब अपने ट्रैक पर आने वाले हाथियों को बचाने के लिए हाई-टेक समाधान अपना रहा है। रेलवे प्रशासन ने वन्य जीव प्राणियों, खासकर हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘एआई-इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम’ (AI-Enabled Intrusion Detection System) का उपयोग शुरू कर दिया है। यह प्रणाली पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में 99.18 रूट किलोमीटर पर लगाई जाएगी, जिससे हाथियों की सुरक्षा में एक बड़ा सुधार आने की उम्मीद है। एआई-इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (DAS) का उपयोग करता है। यह सेंसर ऑप्टिकल फाइबर और हाथियों की चाल के पहले से फीड किए गए सिग्नेचर के आधार पर काम करता है। जैसे ही कोई हाथी ट्रैक पर आता है, यह सिस्टम लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को तुरंत संदेश भेजता है, जिससे समय रहते ट्रेन को रोका जा सके और हाथियों को सुरक्षित बचाया जा सके।
​पहले चरण में यह प्रणाली लालकुआं-गुलरभोज (15.8 किमी), छतरपुर-हल्दी रोड (1.2 किमी), हल्दी रोड-लालकुआं (2.7 किमी), पंतनगर-लालकुआ (1.2 किमी), और लालकुआं-हल्द्वानी (3.2 किमी) सहित कुल 24 रूट किलोमीटर पर लगाई जा रही है। इसके अलावा, काशीपुर-रामनगर और खटीमा-बनबसा खंड पर भी इसे लगाने की प्रक्रिया चल रही है। ​ अन्य उपाय भी लागू
​रेलवे और वन विभाग की टीमें मिलकर हाथियों को बचाने के लिए कई अन्य उपाय भी लागू कर रही हैं। इनमें स्पीड लिमिट, साइन बोर्ड, अंडरपास, बाड़, हनी बी बजर डिवाइस और थर्मल कैमरे शामिल हैं। इन उपायों का लक्ष्य जंगली जानवरों को बचाना और रेल संरक्षा को सुदृढ़ करना है।
​भारतीय रेलवे ने इसके लिए एलिफेंट कॉरिडोर भी बनाए हैं, ताकि प्रतिबंधित क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ कोई दुर्घटना न हो। रेलवे प्रशासन तकनीक के जरिए ट्रैक पर वन्यजीवों, खासकर हाथियों के बचाव के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।


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