औरैया में सदर कोतवाली क्षेत्र में सात साल पुराने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है।विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने दोषी राम गोविंद को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।उस पर पच्चीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो मृदुल मिश्रा ने बताया कि यह मामला सात वर्ष पुराना है। वादी ने सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।तहरीर में बताया गया था कि उसकी 16 वर्ष से कम उम्र की साली,जिसके पिता का देहांत हो चुका था,करीब दो साल से उसके घर पर रह रही थी।नौ जनवरी 2019 की रात को गांव का ही राम गोविंद पुत्र छोटे लाल पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था।जब पीड़िता के घर वालों ने दबाव बनाया,तो आरोपी उसे अगली सुबह गांव के बाहर छोड़ गया।लड़की बदहवास हालत में मिली थी। पूछने पर उसने बताया कि राम गोविंद उसे इकदिल के पास रीतौर में अपनी बहन के घर ले गया था,जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म किया।पीड़िता के परिजन जब थाने में रिपोर्ट लिखाने जाते थे,तो आरोपी उन्हें धमकाकर भगा देता था। बाद में अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देने के बाद यह रिपोर्ट दर्ज की गई।पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।इस मुकदमे का विचारण विशेष न्यायालय पॉक्सो अधिनियम में हुआ। गुरुवार को इस मामले में निर्णय सुनाया गया। सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले के लिए कठोर दंड की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने राम गोविंद को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि यदि दोषी पच्चीस हजार रुपये का अर्थदंड अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। जमा की गई अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को मुआवजे के तौर पर अदा करने का भी आदेश दिया गया है। दोषी राम गोविंद को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।
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