नागरिक समाज, इलाहाबाद के प्रतिनिधियों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए कथित हमले के खिलाफ पुलिस आयुक्त से मिलकर कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।3 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने ‘यूजीसी नियमावली-2026’ विषय पर शांतिपूर्ण परिचर्चा आयोजित की थी, जो 45 मिनट तक स्वस्थ तरीके से चली। तभी भावेश दूबे, सम्राट (आयुष) राय, विपुल तिवारी, अभिनव द्विवेदी, वैभव पांडेय, अनुराग मिश्रा, आयुष दूबे आदि के नेतृत्व में 30-40 अराजक तत्वों ने छात्रों को घेर लिया। मेन गेट से बिना नंबर की एक गाड़ी, जिस पर ‘बजरंग दल’ लिखा था, अंदर घुस आई।आरोपियों ने गाली-गलौज, जातिसूचक अपशब्द, मारपीट की। महिलाओं के साथ अभद्रता, गलत छेड़छाड़, बाल नोचना, लात-घूंसे और अशोभनीय गालियां दी गईं। इससे छात्रों को शारीरिक चोटें और मानसिक आघात पहुंचा। नागरिक समाज का दावा है कि यह सुनियोजित, जातिगत और लैंगिक द्वेष से प्रेरित सामूहिक हमला था, जिसने परिसर में दहशत फैला दी।पीड़ित छात्रा ने साक्ष्यों के साथ कोतवाली कर्नलगंज में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन प्रभारी निरीक्षक ने विश्वविद्यालय या कुलानुशासक कार्यालय से लिखित आदेश न आने और क्षेत्राधिकार न होने का हवाला देकर एफआईआर से इनकार कर दिया। ज्ञापन सौंपने वालों में आनंद मालवीय, अविनाश मिश्रा, डॉ. कमल उसरी, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह, सुनील, शशांक, अंजलि, जयशंकर मौर्य, अनिल यादव, राम अवधपाल, कमरेड भानु, प्रमोद गुप्ता, अमन, आर्यन, प्रशांत आदि शामिल थे। नागरिक समाज ने इसे विश्वविद्यालयों में सिकुड़ते जनवादी स्पेस का उदाहरण बताते हुए खुली चर्चा की मांग की।
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