लखनऊ में उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान के स्थापना दिवस पर एक अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने सात प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने की। इस अवसर पर मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भगवान महावीर के सर्वोदय सिद्धांत जीवन जीने की सच्ची राह दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार प्राचीन धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत है। जैन धर्म से जुड़े ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास हेतु भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। 18 तीर्थंकर जन्म स्थलों पर संगोष्ठियां की गईं संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने जानकारी दी कि संस्थान ने प्रदेश के 18 तीर्थंकर जन्म स्थलों पर संगोष्ठियां आयोजित की हैं, जिनके माध्यम से अहिंसा और अनेकांत का संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया है। शाकाहार, नैतिक शिक्षा और संस्कार शिविरों के जरिए युवाओं में मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025 से सात नए पुरस्कार शुरू किए गया, जिनके तहत हर साल आचार्य को सम्मानित किया जा रहा हैं । इन लोगों को सम्मानित किया गया समारोह में डॉ. श्रेयांश कुमार जैन को तीर्थंकर ऋषभदेव सम्मान, प्रो. शुद्धात्म प्रकाश जैन को महावीर अहिंसा सम्मान और डॉ. विवेक जैन को आचार्य कुंदकुंद सम्मान प्रदान किया गया। इनके अतिरिक्त अन्य अन्य आचार्यो को भी सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर संस्थान और तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे। कार्यक्रम में भगवान महावीर पर आधारित एक पेंटिंग प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिताओं में विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान, शिक्षाविद और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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