“तुम हमसे कोरियन छुड़ाओगे, कोरियन हमारी जान थी। शादी के नाम से तो हमारे दिल में टेंशन होती थी। हमारी पसंद और प्यार कोरियन कल्चर ही था। इंडिया के लड़के से शादी कैसे करें। नहीं, नहीं, नहीं… बल्कि मर गए तो हमें मौत ही अच्छी लगेगी।” ये लाइनें गाजियाबाद में जान देने वालीं तीन बहनों ने सुसाइड नोट में लिखीं। इसमें बताया कि कोरिया, थाइलैंड, अमेरिका, जापान, चीन की फिल्में, गानें और एक्टर पसंद हैं। इसके अलावा, 5 तरह के गेम और 6 तरह के कार्टून अच्छे लगते हैं। इसके साथ ही लिखा- अब तो यकीन हो गया न कि कोरियन हमारी जान हैं। यानी बच्चियों ने तय कर लिया था कि वो कोरियन के लिए अपनी जान भी दे देंगी। पुलिस के मुताबिक, तीनों खुद को कोरियन मान चुकी थीं। यहां तक कि अपने कोरियन नाम भी रख लिए थे। तीनों बहनों ने 3 फरवरी की रात 2 बजे 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। पुलिस को बच्चियों के कमरे से एक डायरी मिली थी। इसके 18 पन्नों में बहनों ने सुसाइड नोट लिखा था। पुलिस ने दैनिक भास्कर को डायरी में लिखी बातें बताईं। इसमें बच्चियों की जिंदगी के बारे में क्या लिखा था? तीनों बहनों ने कोरियन कल्चर को किस तरह अपनी लाइफ में उतार लिया था। जानने के लिए डायरी के पन्ने पढ़िए- ‘हम कोरियन को कितना चाहते थे, अब देख लिया न सब’
बच्चियों ने लिखा- वी लव कोरियन, लव लव लव… सॉरी। इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो, क्योंकि ये सब सच है। आई एम रियली सॉरी… सॉरी पापा, तुम हमसे कोरियन छुड़ाओगे, कोरियन हमारी जान थी। तुमने हिम्मत भी कैसे की, हमसे हमारी जान छुड़ाने की। तुम नहीं जानते थे कि हम उन्हें कितना चाहते थे। लो, अब देख लिया सब। अब तो यकीन हो गया न कि कोरियन फैक्टर और के-पॉप (म्यूजिक) को हम जितना चाहते थे, उतना तो तुम घरवालों को भी नहीं चाहते। कोरियन के अलावा कुछ और भी ऐसा था, जिसे हम अपनी जान से ज्यादा चाहते थे। इन चीजों की लिस्ट भी लिख दी है। पापा, आपको कहना था कि बेटा ठीक किया, लेकिन नहीं बोला
बहनों ने लिखा- कोरियन कल्चर को हम दिल से भी बहुत पसंद करते थे। कोरियन और के-पॉप को तो सबसे पहले। हम इन चीजों को अपना बनाना चाहते थे, लेकिन तुम लोगों ने मौका ही नहीं दिया। जबकि हम लोग अपने के-पॉप और कोरियन रिश्तेदारी को जानते थे। हमेशा कहते रहे कि यही हमारा भविष्य है। पापा, तुम्हें हम तीनों के भविष्य के लिए कुछ नहीं बोलना था। तुम्हें बोलना था- ठीक है, बेटा, लेकिन तुमने नहीं बोला। हमें यही बुरा लगता था। फिर हमने फैसला किया और उस चीज को अपना दुश्मन बना लिया।
पापा, क्या दुनिया में तुम्हारा सिर खाने के लिए जिएं? नहीं
बच्चियों ने अपने पापा के लिए लिखा- हम क्या दुनिया में तुम्हारा सिर खाने के लिए जिएं, नहीं न। इससे अच्छा तो मर ही जाएं। हम खुद से भी अपनी उम्मीद खो चुके हैं। इसलिए हमने खुदकुशी कर ली। सॉरी पापा। अब पढ़िए पूरा मामला
3 फरवरी की रात तीन नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर सुसाइड कर लिया। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात 2 बजे तीनों ने कमरे को अंदर से बंद किया। फिर स्टूल रखकर एक-एक करके बालकनी से छलांग लगा दी। पिता ने कहा कि बेटियों ने कोरियन गेम खेलने के दौरान टास्क पूरा करते हुए मौत को गले लगाया। हालांकि, पुलिस की 10 घंटे की छानबीन के बाद पता चला कि पिता ने बच्चियों को डांटा था और मोबाइल छीन लिया था। इसके चलते तीनों ने यह कदम उठाया। पिता चेतन शेयर ट्रेडिंग का काम करते हैं। बच्चियों ने कोरोना काल से ही स्कूल जाना छोड़ दिया था। घटना भारत सिटी बी-1 टॉवर के फ्लैट नंबर 907 की है। तीनों बहनों के सुसाइड से जुड़ी हुईं ये खबरें भी पढ़ें- गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड, बहनें खुद को कोरियन मानती थीं:यूट्यूब से भाषा सीखी; हिंदुस्तानी लड़के पसंद नहीं थे सुसाइड करने वाली बहनों के पिता ने 2 शादी कीं:साली से अफेयर, बेटियों से कहता था- मोबाइल छोड़ दो सुसाइड करने वाली 3 बहनों का रहस्यमयी कमरा:दीवारों पर स्केच, क्रॉस के निशान, लिखा- मैं बहुत अकेली हूं 9वीं मंजिल से कूदने के बाद तीनों बहनों को ब्रेन-हैमरेज:पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, गाजियाबाद में परिवार ने खुद को फ्लैट में बंद किया
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