जालौन में कुठौंद थाने के इंस्पेक्टर अरुण राय की मौत के मामले में आरोपी सिपाही मीनाक्षी शर्मा की सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अभिषेक खरे की अदालत में पांचवीं पेशी हुई। यह पेशी जिला जेल से दोपहर करीब 3:30 बजे कराई गई। करीब पांच मिनट चली पेशी के दौरान अदालत ने सिपाही मीनाक्षी शर्मा की स्थिति से संबंधित जानकारी ली। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख नियत कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले सिपाही मीनाक्षी शर्मा की ओर से सीजेएम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इससे पहले मीनाक्षी शर्मा की पेशी 19 दिसंबर, 1 जनवरी, 13 जनवरी और 23 जनवरी को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो चुकी है। वह 7 दिसंबर 2023 से न्यायिक हिरासत में है और यह पूरा मामला न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रहा है। इसी बीच, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने मीनाक्षी की ओर से अधिवक्ता राजेश चतुर्वेदी द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद, जिला एवं सत्र न्यायालय में एक नई जमानत याचिका दायर की गई है, जिस पर 3 फरवरी को सुनवाई होनी थी, लेकिन अब इस पर अगले हफ्ते 9 फरवरी को सुनवाई होगी। यह उल्लेखनीय है कि 5 दिसंबर की रात कुठौंद थाने के सरकारी आवास में इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की अपनी सर्विस पिस्टल से गोली लगने से मौत हो गई थी। इंस्पेक्टर की पत्नी माया राय ने इस घटना को हत्या मानते हुए महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 7 दिसंबर को मीनाक्षी शर्मा को गिरफ्तार कर लिया और उसी दिन उसे न्यायालय में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में उरई जिला कारागार भेज दिया गया था। पुलिस जांच के अनुसार, घटना वाली रात इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय अपने सरकारी आवास में मौजूद थे और महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा भी उनके कमरे में थी। अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई देने के बाद मीनाक्षी शर्मा चीखते हुए कमरे से बाहर निकली थी। उसकी ये गतिविधियां थाने परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई हैं, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर रही है। विवेचक व कुठौंद थाने के प्रभारी निरीक्षक अजय पाठक के अनुसार, फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि गन पाउडर की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट आने के बाद विवेचना को अंतिम रूप देकर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अभी तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, जिससे सुनवाई को लेकर निगाहें टिकी हुई हैं।
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