इटावा के बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैकड़ों साल पुरानी सैय्यद बाबा दरगाह के ध्वस्तीकरण से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले की सुनवाई सामाजिक वानिकी न्यायालय में हुई, जहां दरगाह के देखरेख करने वाले फजले इलाही की ओर से वन विभाग के नोटिस को चुनौती दी गई। न्यायालय में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और अगली सुनवाई की तारीख 16 फरवरी तय की गई है। न्यायालय में रखी गई दलीलें सामाजिक वानिकी न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान पक्षकार फजले इलाही और उनके अधिवक्ता नदीम अहमद खान ने प्रार्थना पत्र देकर वन विभाग से कुछ जरूरी जानकारियां मांगीं। उनका कहना था कि वे लोग सैकड़ों वर्षों से इस दरगाह पर जियारत करते आ रहे हैं और इस परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यदि यहां से न्याय नहीं मिला तो वे सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई इस पूरे मामले की शुरुआत मुख्यमंत्री पोर्टल आईजीआरएस पर 3 जनवरी 2026 को दर्ज की गई एक शिकायत से हुई थी। शिकायत में बीहड़ वाले सैय्यद बाबा की मजार को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद वन विभाग ने अपनी शुरुआती जांच में मजार को वन विभाग की भूमि पर स्थित पाया और इसे अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई शुरू की। ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा जांच के बाद वन विभाग की ओर से दरगाह के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया। विभाग ने दरगाह से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने पर ध्वस्तीकरण का नोटिस दरगाह परिसर में चस्पा कर दिया गया। इस नोटिस के खिलाफ फजले इलाही की ओर से वन विभाग को जवाब भी दिया गया था। वन विभाग न्यायालय में पेशी वन विभाग ने इस मामले की सुनवाई के लिए 5 फरवरी को फजले इलाही को वन विभाग न्यायालय में बुलाया था। सुनवाई के दौरान फजले इलाही और उनके अधिवक्ता ने अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए अगली तारीख 16 फरवरी तय की गई। वन विभाग का पक्ष बढ़पुरा के वन रेंजर अशोक शर्मा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच की गई। जांच में यह सामने आया कि यह दरगाह वन विभाग के किसी भी नक्शे में दर्ज नहीं है। साथ ही यहां पहले से होने वाले किसी भी धार्मिक या अन्य कार्यक्रम के लिए वन विभाग से कभी अनुमति नहीं ली गई। इसी आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।
आगे की लड़ाई का संकेत पक्षकार फजले इलाही और उनके अधिवक्ता नदीम अहमद खान ने दो टूक में कहा है कि यदि उन्हें इस न्यायालय से न्याय नहीं मिलता है तो वे उच्च अदालतों का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेंगे।
अब सभी की नजरें 16 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस सैकड़ों साल पुरानी दरगाह के भविष्य को लेकर अहम फैसला हो सकता है।
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