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‘2 साल से सऊदी में बंधक हैं पिता’:उम्मीद लेकर CM जनता दर्शन में लखनऊ आया बेटा, बोला- अफसरों ने 10 सेकंड में लौटा दिया

‘मेरे पापा को 2 साल से सऊदी अरब में बंधक बनाकर रखा गया है। वह भारत नहीं आ पा रहे हैं। उन्हें वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय एंबेसी का चक्कर काटकर थक गया।
आखिरी उम्मीद लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन में पहुंचा, लेकिन वहां भी सुनवाई नहीं हुई। अफसरों ने योगी आदित्यनाथ से मिलने तक नहीं दिया। मात्र 10 सेकंड में अफसरों ने मामला विदेश मंत्रालय भेजने की बात कहकर वापस कर दिया।’ यह दर्द देवरिया के रहने वाले अमन पासवान का है। उनके पिता हीरा प्रसाद सऊदी अरब में लोडर ट्रक चलाने गए थे। वहां एक एक्सीडेंट के बाद उन्हें 22 दिन का जेल हुआ। जेल से रिहाई के दौरान वह जालसाजों के चक्कर में फंस गए।
तब से उनका परिवार उन्हें भारत वापस लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। अमन ने दैनिक भास्कर से अपनी पीड़ा शेयर की। पढ़िए अमन ने जो बताया… अरबी न आने की वजह से पिता को फंसाया अमन ने बताया- मेरे पापा सऊदी अरब में लोडर ट्रक चालक के रूप में काम करते थे। काम के दौरान करीब 2 साल पहले एक मामूली सड़क दुर्घटना हुई। पिता ने ट्रक साइड में खड़ा किया था, तभी एक दूसरी गाड़ी ने हल्की टक्कर मार दी। नुकसान अधिक नहीं था, फिर भी स्थानीय पुलिस ने पापा को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। वह 22 दिन तक जेल में रहे। पापा को अरबी भाषा नहीं आती है। वहां मौजूद लोगों ने उनसे अरबी में कुछ लिखे हुए एक कागज पर अंगूठा लगवा लिया। पापा को बताया कि यह प्रक्रिया जेल से रिहाई के लिए है, लेकिन बाद में उसी कागज के आधार पर 20,000 रियाल का जुर्माना दिखा दिया गया। उस कागज को कोर्ट में पेश कर पापा के भारत लौटने पर भी रोक लगवा दी। तभी से मालिक उन्हें बंधक बनाए हुए है। भारतीय एंबेसी ने कोई मदद नहीं की अमन ने बताया- मेरे पापा के मामले में सऊदी अरब स्थित भारत की एंबेसी ने भी इस मामले में कोई प्रभावी भूमिका नहीं निभाई। पापा फोन पर बस यही कहते हैं कि किसी तरह हमें वापस बुला लो। एंबेसी पूरा मामला जानने के बाद भी शांत बैठी है। कोई कानूनी या मानवीय मदद नहीं दी जा रही है। 3 बार दिल्ली गया, लेकिन मदद नहीं मिली अमन ने कहा- मैं 3 बार दिल्ली गया। पहले प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा। वहां से विदेश मंत्रालय भेजा गया। विदेश मंत्रालय से पटियाला हाउस के चक्कर कटवाए गए। हर जगह सिर्फ एक ही जवाब मिला कि ई-मेल भेजिए। ई-मेल करने के बाद कुछ समय में फाइल का स्टेटस क्लोज कर दिया जाता है। मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया गया अमन ने बताया- आखिरी उम्मीद लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन में अपनी बात रखने लखनऊ पहुंचा। पहले अधिकारियों ने पूरा मामला विस्तार से सुना और इंतजार करने को कहा। जब दोबारा अधिकारी आए तो महज 10 सेकंड का समय दिया गया। अधिकारी यह कहकर आगे बढ़ गए कि मामला विदेश मंत्रालय को भेज दिया जाएगा। सिर्फ कागजों में खेल रहे अफसर, खुद सऊदी जाऊंगा अमन ने बताया- हर विभाग में सिर्फ कागजी कार्रवाई का खेल चल रहा है। कभी लेटर लिखो, कभी ई-मेल करो। जमीन पर कोई अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। हमारा परिवार पूरी तरह टूट चुका है। पापा को वापस लाने अब खुद सऊदी जाऊंगा अमन ने बताया- हम 3 भाई और एक बहन हैं। मैं सबसे छोटा हूं। बड़े भाई गुजरात में नौकरी करते हैं। पापा के विदेश में फंसे होने से पूरे परिवार की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई है। मेरी मां की हालत बहुत खराब है। घर में लगातार तनाव है। अब कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा। मजबूरन लगता है कि मुझे खुद सऊदी अरब जाना पड़ेगा, ताकि किसी तरह पापा को वापस ला सकूं। ——————————————– जनता दर्शन की ये खबर भी पढ़िए… योगी को अली ने ABCD सुनाई, बोली- एडमिशन करवा दीजिए : हम शेर बच्चे… कविता सुनते ही CM ने कहा- तुरंत दाखिला कराओ लखनऊ में सोमवार को मुख्यमंत्री जनता दरबार में मासूम बच्ची मां के साथ पहुंची। उसने मासूम अंदाज में सीएम योगी ने कहा, ‘मेरा एडमिशन करा दीजिए।’ बच्ची का अंदाज देख योगी मुस्कराने लगे। उन्होंने पूछा, ‘किस क्लास में एडमिशन चाहिए? बच्ची ने जवाब में कहा- नर्सरी में सर। फिर सीएम ने कहा- …(पूरी खबर पढ़िए)


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