बुलंदशहर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 33 केवीए विद्युत लाइन बिछाने के कार्य में लगभग दो करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों ने टेंडर की शर्तों में हेरफेर कर अनावश्यक मदों में धनराशि जोड़ी, असीमित खर्च दिखाया और फर्जी बिल तैयार कराए। जानकारी के अनुसार, करीब पांच साल पहले जल निगम के प्रस्ताव पर ऊर्जा निगम को मोहन कुटी स्थित सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 33 केवीए लाइन बिछाने की स्वीकृति मिली थी। एमडी कार्यालय से लगभग आठ करोड़ रुपये के टेंडर को मंजूरी दी गई थी। टेंडर की शर्तों में स्पष्ट रूप से सड़क काटने की बजाय अंडरग्राउंड रोड क्रॉसिंग के लिए धनराशि शामिल थी, ताकि सड़क को नुकसान से बचाया जा सके। सड़क खुदाई के नाम पर राशि बढ़ाई गई आरोप है कि स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर की शर्तों से अंडरग्राउंड रोड क्रॉसिंग का प्रावधान हटा दिया गया। इसके बाद अधिकारियों ने सड़क खुदाई के नाम पर अलग से रोड कटिंग चार्ज जोड़कर टेंडर की राशि बढ़ा दी। कार्य पूरा होने के बाद भी बार-बार कार्य को बढ़ा हुआ दिखाकर अतिरिक्त भुगतान कराया गया। निरीक्षण में हुआ खुलासा निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर लाइन सड़क किनारे बिछी थी और सड़क काटी ही नहीं गई थी। इसके बावजूद चार किलोमीटर तक सड़क खुदाई का बिल लगाया गया। इस प्रकार करीब दो करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। ऊर्जा निगम ने जांच के आदेश दिए ऊर्जा निगम के शहरी खंड के अधिकारियों पर फर्जी बिल तैयार करने का आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता संजीव कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
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