मोनाड यूनिवर्सिटी सरकारी छात्रवृत्ति घोटाले में फंस गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ने सामान्य वर्ग के छात्रों को अनुसूचित जाति (SC) दिखाकर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हड़प ली। जिला प्रशासन की जांच में करीब 53 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। इसके बाद यूनिवर्सिटी को छात्रवृत्ति योजना से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। साथ ही, यूनिवर्सिटी से रकम की वसूली और FIR दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि पिछले वर्ष छात्रवृत्ति वितरण की रूटीन जांच के दौरान मोनाड यूनिवर्सिटी में बड़ी अनियमितताएं मिलीं। जांच के लिए 2013 से 2025 के बीच के मामलों को रैंडम आधार पर चुना गया। इसमें 90 प्रतिशत छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति के मामले फर्जी पाए गए। कुल 53 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ, जिसमें 50 करोड़ रुपये अनुसूचित जाति वर्ग की और 3 करोड़ रुपये सामान्य वर्ग की छात्रवृत्ति शामिल है। घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की थी। टीम ने अपनी जांच में पाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मनमाने तरीके से पात्रता मानकों को दरकिनार करते हुए छात्रवृत्ति का दुरुपयोग किया। टीम की रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद, जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने सख्त कार्रवाई की। उन्होंने मोनाड यूनिवर्सिटी को छात्रवृत्ति योजना से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब मोनाड में पढ़ने वाला कोई भी छात्र सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले पाएगा। इसके साथ ही, 53 करोड़ रुपये की रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी और यूनिवर्सिटी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग का अनुमान है कि यह घोटाला अभी शुरुआती स्तर पर है। विभाग का मानना है कि जैसे-जैसे पिछले 10 वर्षों की छात्रवृत्ति की गहन जांच होगी, यह राशि 150 करोड़ रुपये से भी अधिक तक पहुंच सकती है। इस संबंध में, यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मोहम्मद जावेद ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कोई जानकारी नहीं है और समाज कल्याण विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। डॉ. जावेद के अनुसार, यूनिवर्सिटी में सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। पहले भी विवादों में रही है मोनाड यूनिवर्सिटी
मोनाड यूनिवर्सिटी पहले से ही फर्जी डिग्री और मार्कशीट बिक्री शिक्षा माफिया नेटवर्क,यूनिवर्सिटी मालिक सहित 12 लोगों की जेल यात्रा, जैसे गंभीर मामलों में जांच का सामना कर रही है। छात्रवृत्ति घोटाले ने यूनिवर्सिटी की साख पर एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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